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कतनो करी कोनो जतन नै करछै ओ छेरखानी गे सखी

हमर  पिया बड  लजकोतर छै  नै करै  शैतानी गे सखी।
देह मे भिरते लाज स भजाइ छै ओ पानी-पानी गे सखी।।

नै आगू  आवै   नै  बतीयाय  नै  समझै  छै  कोनो  ईशारा।
बिछान प अबिते सुइत रहै छै कोना सूनैयै कहानी गे सखी।।

कहीया होतै सियांन  कहिया लगौथिन धियान  से नै जानी।
पिया  रहीतो  अकेले  काटी  हम  चढल  जवानी गे सखी।।

हम  किछु  कहै  छीयै  त  लजाक  दौड़  भगै  अो  बहर।
कोन  टोना  करवै  तब  पिया  करतै  मनमानी  गे सखी।।

दोसर  के  पिया  देख  क  तरसैत  रहैय  मोन  हमर
कतनो करी कोनो जतन नै करछै ओ छेरखानी गे सखी।।

 लेखक ✍  सत्या यादव (सरोज)
 हाल:- मलेशिया

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