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हम बैसल छी बाट निहारैत प्रिय

चलि गेलियै अहाँ मुसकी मारैत प्रिय  
हम  बैसल  छी   बाट  निहारैत  प्रिय 

दोख आँखिक रहै दंड हृदयकेँ भेटल
अहुरिया काटैत छै  मोन  पारैत प्रिय 

थालसँ थाल अहाँ कहू न' धोबै कोना
जिनगी बितत सगर जग परतारैत प्रिय

भरोस टूटलै  भले  आस पनघैत रहल
दीप बिहारियोमे रहलौं हम बारैत प्रिय

भेलै कुक्कुरेके बास घर आँगन दुआरि
कहि खोंताकेँ फ्लेट रही बहटारैत प्रिय

~>लेखक ✍मैथिल प्रशान्त
  दुर्गौली, बेनीपट्टी ।

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