पाइन में छि हम
अजमाके देखु कतेक पाइनमे छि हम ।
भरल कठाैत पाइनमे नै समुन्द्रमे छि हम ।।
माइ बाबुके कहल नै छोडल करै छि हम ।
सब दिन आशिर्वादक साथल अगा बढै छि हम ।।
यी नै सोचु नै पढै छि त कुछ नै जानै छि हम ।
अहाके तकनाइ स कि कह चहै छि बुझै छि हम ।।
कतेक याद आबैय नै बुझु अहा बुझै छि हम ।
केकरो नै कैह दिलमे सजाक राखै छि हम ।।
कतबो दुखित रहै छि जाने नै दै छी केकरो हम ।
हत खन ठाेरमे मुस्कान लाबी हसैत रहै छि हम ।।
जतेक खिधाश करके ये हमर करैत रहु कुछ नै कहब हम ।
एक ने एक दिन आपन लक्ष्य पूरा कके जरुर देखायब हम ।।
✍बिनोद मेहता
भोक्राहा सुन्सरी
-हाल (बिराटनगर, मोरङ)
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