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चाँन,अहाँके देखियेके मोन बुझा लेलहुँ

चाँन,अहाँके देखियेके मोन बुझा लेलहुँ

एम्की चौरचन गामक यादेमे मना लेलहुँ॥

खिर-पुरी,पान-मखान आरो व्यञ्जन संग

मोनक चौका खूब जतन सँ सजा लेलहुँ॥

धुम-धाम सँ भेल होयत अहाँके जयकार,

कल जोडि एतै सँ भण्डारा लगा लेलहुँ॥

कलस लऽ माय हमर हाथ उठेनइ हेती,

भाइ खेने हेत मरर पर,बुझु खा लेलहुँ॥

© विद्यानन्द वेदर्दी

2073/05/19




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