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किड़िया

 किड़िया
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किड़ीया खाय छी आय दिन स
नै  करब  पारेशान  यै
घुरि आऊ  वापस नैहर स हम
पकरै छी दुनु कान यै।

भोरे  उठी  हम  चाय   बनायब
बिस्तर तक  पहुचायब
बैसि बगल में धीरे धीरे
पैरो    सेहो    दबायब
आस  परोस नै झाँकब कहियो
अही हमर छी चान यै।

टुन्ना   मुन्ना   धिया   पुता  के
भरि दिन  हम  खेलायब
साँझ सवेरे राशन सब्जी
सबटा   हमहीं     लायब
भोजन    के    परवाहे    छोरू
राखु   हम्मर  मान  यै।

घुरि आऊ वापस ..........
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लेखक✍ राजीव कर्ण ।

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