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जग केर रित

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जग केर रित एको रत्ती नै लागै सोहान रे
नै जानी किया अपनो भ' जाए छै आन रे

मिठ मधुर बोली की छै से ओकरा पते नै
फाटल मुह तित बोलिये पर छै गुमान रे

अपने मे भरल खराबी कहै जुग छै पापी
दोस लगा दोसरके अपनाके बुझै महान रे

बकरी बरध जका बेच बिखन होएत बेटा
दहेजेमे छै ओझराएल देखु सौसे जहान रे

धर्मक ठिकेदार लड़ा रहल छै एक दोसरमे
तै चानन टोपी बिच नै भ' रहल मिलान रे

✍ अशरफ़ राईन
हॉल : कतार

#अपन_मिथिला

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