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फेर सँ एलै समय लगन केर ....

फेर सँ एलै समय लगन केर
धी लेल बरक हेतै ओरियान
पूत बला सब मोछ पिजाओत
भरिगर करत दहेजक माँग

धनिकहा सबके कोन छै चिंता
कीन लेत बर टाका देत गीन
मुदा गरीब की करतै हौ दैबा
आँखिक ओकर बिलायत नीन

केहेन ई रीत भेलए एहि जग में
लोक बेचए अछि टाका लेल कोंख
मुदा रीत ई बनाओल एहि लोकक
एहि में विधना केर कोन दोख

टी•वी•, पलंग, फ्रीज़ - फटफटिया
एहि सुविधा लेल सब करय ई पाप
जे अधम काज करए अछि पापी
हाथ ल' कंठी करए वेह जाप

जाहि धिया सँ वंश फलए अछि
किया ओकरे संग होय एहेन व्यवहार
मोन मनीषक जे फाँसी द' दी ओकरा
जे मोन म' आनय एहेन विचार

थर- थर काँपए हाथ इ लिखतो
भ' मोन विभोरित कानि रहल
जे नहिं करत मान देवी केर
अपनहिं सँ ओ जायत ठकल ।।

अंतिम गप ई जे जाबत धरि युवा वर्ग नहिं चाहता ता धरि एहि दहेज सन् विचित्र और घृणित रोग कें स्वयं ब्रह्मा , विष्णु आ महेश सेहो नहिं मेटा सकै छथि ।
त' आऊ डेग बढाबी , दहेज मेटाबी ।

>>>>✍ Manish Jha

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