अमित पाठकक ५ टा छठी मइया केर गीत - अप्पन मिथिला -Appanmithila is Maithili Portal for News ,Articles and Entertainment

Breaking News

अमित पाठकक ५ टा छठी मइया केर गीत

अमित पाठकक जी केर ५टा छठी मइया केर गीत


(१)

चलु चलु चलु बहिना चलु छठि घाट हे,
छठि महरानी हेती ताकैत बाट हे-२
चलु चलु चलु.........
जैह अछि सैह लय चलु माय पास हे-२
रोष नहि करती माँ ठोकि देती माथ हे-२
चलु चलु चलु............
डाली रंग-विरही आ रंग-रंग पड़ात हे-२
अरघ देवनि आइ-काल्हि दीनानाथ हे-२
चलु चलु चलु.............
कहु चाहे कहु नहि पूर हैत आश हे-२
माय के नजरि सब पर एक साथ हे-२
चलु चलु चलु.............
छठि महरानी..............


(२)

ऊगह हे दीनानाथ अरघ के बेरिया
                    आब बेर बीतल जाय
कतेक कठिन व्रत ठानल बरतिया
                     आब हूब टूटल जाय
ऊगह हे दीनानाथ.............
जहिये नहाय-खाय तहिये अराधल
पूजब छठि माइ के गोर,
बड़े रे जतन राखि कयलनि खरना
जल बिनु सूखल ठोढ़ !
तखनहुँ हर्षित मोनहि बरतिया
                   रहलनि आश लगाय
ऊगह हे दीनानाथ..............
डुबितहुं तोहर मान जे राखल
पहिल अरघ तोहे देल,
आब तहुँ राखह मान सुरुजदेव
ऊग' ऊग' भेल बड़ बेर !
करहु कृपा सब पर हे दिनकर
                     सब पर होउ सहाय
ऊगह हे दीनानाथ..............
कतेक कठिन व्रत................

(३)

छठि माइ के महिमा अपार,
              जगत में के ने जानइए
सबहक  भरथि  भंडार,
             जगत में के ने जानइए
छठि माइ के...............
बांझिन के पूत देल कोढ़िन के काया
छोट-पैघ ऊँच-नीच सब लेल छाया
सब लए फुजल दरबार,
             जगत में के ने जानइए
छठि माइ के...............
निर्धन के ध'न देल निर्मम के ममता
मैया के किरपा सँ केकरो ने खगता
भेल सब सपना सकार,
             जगत में के ने जानइए
छठि माइ के................
माइ परमेशरी बलाय-रोग हरती
दूरहि दरिद्रा आ पूर आश करती
संकट सँ करती उबाड़,
             जगत में के ने जानइए
छठि माइ के................
आऊ हिलि-मिलि करी पाबनि छठि के
घूरि क' ने आबए  बलैया पलटि के
माइ देती आशिष हजार,
              जगत में के ने जानइए
छठि माइ के................
सबहक भरथि............

(४)

अएलौं दुअरिया अहीं के छठि मैया,
ललसा जे मोनक पुराऊ
हे राणा माय...........
दुखिया के अत्मा जुड़ाऊ
हे राणा माय...........
कएलौं हे माय बड़ स'खे बरतिया
आब सुइन लिय' ने हमरो अरजिया
छोड़ि अहां ककरा सुनाऊ
हे राणा माय...............
आँचर पसारि एगो मांगै छी ललना
चहकए चिड़ैं सन दुआरि घर अंगना
बांझिन के कोइख सजाऊ
हे राणा माय...........
उगथि सुरुजदेव दरश देखाबथि
भोरुक किरिण सँ दरिद्रा भगाबथि
सूतल छथि ओ जगाऊ
हे राणा माय.............
ललसा जे मोनक.....
हे राणा माय.............
दुखिया के................


(५)

दीनानाथ
उगु उगु उगु भेल बेर
दीनानाथ............
छँटि गेल रातुक स्याह अन्हारे
चुन-मुन चिड़ैंक टेर
दीनानाथ.............
जल भय ठाढ़ करए सब सुमिरन
कर जोड़ि जेड़क-जेड़
दीनानाथ.............
हाथ उठाओल कएल वरतिया
नियम डेबल जत् भेल
दीनानाथ.............
अर्घक लगन बितए हे दिनकर
करब कतेक अबेर
दीनानाथ..............
रहि गेल अविध-सविध हम मानल
क्षमब हे प्रभु त्रुटि लेल
दीनानाथ..............


अमित पाठक


[गाम -कोरथू, जिला -दरभंगाक रहनिहार , अमित पाठक सम्प्रति पटना मे रहैत छथि आ जीवनों यापनक लेल मेडिकल सेक्टर मे काज करैत छथि. अमित मूल रूप सं विशुद्ध गीतकार छथि आ एहि बहुविधावादी समय मे गीत विधाक बचेबाक लेल प्रतिबद्ध छथि.आइ जखन कि मैथिली गीतक भोजपुरीकरण भ' रहल अछि, अमित पाठक पूर्णतया साहित्यिक गीतक सृजन क' मैथिली गीतक नीक भविष्यक बाट प्रसस्त क' रहल छथि- मॉडरेटर]



🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷



कोई टिप्पणी नहीं