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अनधनसँ घर भरू ना

छठि गीत

✒✍शिव कुमार झा "टिल्लू

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बेरि बेरि आरती उतारब सुरुजदेव
अनधनसँ घर भरू ना ......

अनधनसँ घर भरू जगकेँ आरोग करू
दूध घ्रित गंगाजल ढारब दिवसपति
घाटदिशि नजरि करू ना.......

पांचालीक व्रतक फ'ल पाण्डवकेँ देलियनि
धर्मक विजय लेल अधर्म अंत केलियनि
पुनि भक्ति कांपि रहल पापक आलम्बसँ
सनातन उद्धार करू ना.......

प्रत्यूषा- उषा माय अहींकेँ सुनती
हुनक निन्न तोडू कहू भक्तो दिशि तकती
दानवीरक अंगराज्य मिथिले अनंगमे
एकरोसँ हिय जोडू ना ......

अनुजा छठिमायक पियरगर सहोदर
जड़ि-जड़ि क' सबहक भरै छी लम्बोदर
धूप दीप गुग्गल केर थाली भेल खाली
आबहु त' दृष्टि धरू ना ......

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✒✍शिव कुमार झा "टिल्लू"
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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