कोजगरा....
कोजगरा -
✍मिथिला संस्कार पेज सँ
आश्विन शुक्लक पूर्णिमा कें कोजगरा मनाओल जाइत अछि I नव विवाहित वर के घरक आँगन में पिठार सँ अष्ट दल कमलक अरिपन देल जाइत छैक आ ताहि ऊपर भार में आयल डाला (जाहि में मखान,नारियल,पान,सुपारी ,जनउ ,कउरी ,पचीसी आ शतरंज राखल रहैत छैक) से राखल जाइछ I डाला केर सामने पुरहर (जाहि में एकटा दीप जरैत राखल रहैत छै ) आ कलश (जाहि में जल आ आम क पल्लव रहैत छैक ) पिठार (चौरक पीसल)लगा राखल जाइत छैक I एकटा पीढ़ी पर अरिपन दय अष्ट दलक पश्चिम में राखल जाइत अछि I राति में विवाहित वर सासुर सं आयल कपड़ा पहिर पीढ़ी पर पूर्व दिशा दिस भ'अ बैसैत छथि I वर के दूबि ,धान ल'अ पाँच बेर निहुँछल जाइत छैन्ह। चूमाओन क बाद कम सं कम पाँच टा ब्राह्मणक द्वारा दूर्वाक्षत देल छैक।
दूर्वाक्षत मंत्र
“ओम आब्रह्मन ब्राह्मणों ब्रह्मवर्चसी जायतांमा राष्ट्रे राजन्यः शूर इष्व्योति व्याधी महारथो जयताम दोग्घ्री धेनुढा न डवानाशुः सप्तिः पुर्न्ध्रिषा विष्णुर थेषटा सभेयो युवा स्य यजमानस्य वीरो जयताम निकामे निकामे नःपज्जॅन्यो वर्षतु फलवत्यो न ओषधय पच्यनताम् योगक्षेमो न कल्पताम् I
मंत्रथाँय सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः शत्रुणा बुद्धिनाशोस्तु मित्राणामुदयसत्व ..
तदोपरांत वर भगवती कें प्रणाम कय अपन श्रेष्ठ गण के प्रणाम करैत छथि आ घर में भोज भातक आयोजनक संग पान आ मखान गामक लोक में बाटल जाइत छैक I
फोटो साभार : अप्पन गाम अप्पन बात
✍मिथिला संस्कार पेज सँ
आश्विन शुक्लक पूर्णिमा कें कोजगरा मनाओल जाइत अछि I नव विवाहित वर के घरक आँगन में पिठार सँ अष्ट दल कमलक अरिपन देल जाइत छैक आ ताहि ऊपर भार में आयल डाला (जाहि में मखान,नारियल,पान,सुपारी ,जनउ ,कउरी ,पचीसी आ शतरंज राखल रहैत छैक) से राखल जाइछ I डाला केर सामने पुरहर (जाहि में एकटा दीप जरैत राखल रहैत छै ) आ कलश (जाहि में जल आ आम क पल्लव रहैत छैक ) पिठार (चौरक पीसल)लगा राखल जाइत छैक I एकटा पीढ़ी पर अरिपन दय अष्ट दलक पश्चिम में राखल जाइत अछि I राति में विवाहित वर सासुर सं आयल कपड़ा पहिर पीढ़ी पर पूर्व दिशा दिस भ'अ बैसैत छथि I वर के दूबि ,धान ल'अ पाँच बेर निहुँछल जाइत छैन्ह। चूमाओन क बाद कम सं कम पाँच टा ब्राह्मणक द्वारा दूर्वाक्षत देल छैक।
दूर्वाक्षत मंत्र
“ओम आब्रह्मन ब्राह्मणों ब्रह्मवर्चसी जायतांमा राष्ट्रे राजन्यः शूर इष्व्योति व्याधी महारथो जयताम दोग्घ्री धेनुढा न डवानाशुः सप्तिः पुर्न्ध्रिषा विष्णुर थेषटा सभेयो युवा स्य यजमानस्य वीरो जयताम निकामे निकामे नःपज्जॅन्यो वर्षतु फलवत्यो न ओषधय पच्यनताम् योगक्षेमो न कल्पताम् I
मंत्रथाँय सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः शत्रुणा बुद्धिनाशोस्तु मित्राणामुदयसत्व ..
तदोपरांत वर भगवती कें प्रणाम कय अपन श्रेष्ठ गण के प्रणाम करैत छथि आ घर में भोज भातक आयोजनक संग पान आ मखान गामक लोक में बाटल जाइत छैक I
फोटो साभार : अप्पन गाम अप्पन बात

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