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एक गरीब बेटी आ शराबी बाप

एक गरीब बेटी आ शराबी बाप


✍अशोक कुमार सहनी



एक गरीब परिवार में एक सुन्दर सन बेटी👰 जन्म लेलक..

बाप के बहुत दुख भगेल कम से कम बेटा होइत त काम में त हाथ बटाबैत,,
        उ बेटी के पाल पोस केलक जरूर,
 मुदा दिल से नै....

बेटी पढ जाय छेल तब नै टाइम में स्कूल के फीस जमा करै छेल,
आ नै  कापी किताब पर ध्यान दै छेल...
खाली दारू पी के घर में कोहराम(हला) मचाबै छेल........

उ लडकी के माइ बहुत नीक आ बहुत भोली भाली छेल उ अपन बेटी के बहुत  प्यार दुलार से रखै छेल...
उ पति से छुपा-छुपा के बेटी के फीस जमा कैर दै छेल ।
और कापी किताबो के खर्चा दै छेल ..
अपन पेट कइटके फटल पुरान कपडा पेहेन के  गुजारा कैर छेल,
 मुदा बेटी के पूरा खयाल रखै छेल...

पति घर सँ कतेक कतेक दिन के लेल गायब भजाइ छेल

जतेक कमाबै छेल दारू मे  फूक दैछेल...

समय के पहिया घूमैत गेल
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बेटी धीरे-धीरे समझदार होइत गेल..
११ क्लास में ओकर भरना  होइके छेल.
माइ के पास यतेक पैसै नै छेल जे बेटी के  स्कूल में भरना कसके..
बेटी डरैत डरैत बाप के कहलक:
बाबु हम पढ चाहै छि हमर हाईस्कूल में भरना करा दिय मइया ल पैसै नै अछि...
बेटी के बात सुइनते बाप लाल पियर भगेल आ जोर जोर सँ चिचियाके कहलक: तू कतनो  पढ़ लिख लेबही  तोरा त् चौका चूल्हि  फुक परतों की करभी तू ज्यादा पढ़ लिख के..

उ दिन ओकर घर में बहुत बडाका झगड़ा आ सबके माइर पीट केलक

बाप के ई रबैया देखके बेटी अपन मने मने सोचलक कि अब उ आगु के पढाई नै करब....

एक दिन ओकर मइया लहानबाजार गेल

बेटी  पूछलक :मइया कत गेल छेलहि ।
 मइया ओकर बात के नै सुनैत कहलक :
बेटी काल्हि हम तोहर स्कूल में भरती करादेबौ

बेटी कहलक: नै मइया अब हम नै पढ़ब हमरे कारण से तोरा कतेक परेशा होईला पड़ै छो आ बाबु सेहो तोरा मारै पीटै हो कहैत कहैत  'कान लागल' ..
मैया ओकर छाती से लगाके  कहलक: बेटी हम लहानबाजार से कुछ रुपैया लके ऐल छि आ हम तोरा आगु पढे बौ..
बेटी मईयाके मुह ताकैत  पूछलक: मैया तू यतेक पैसै कत से आनयलही??
मइया ओकर  बात के फेर अनसुन करैत  कुछ नै कहलक...

समय बितैत गेल
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"मईया ओकर बहुत मेहनत कके बेटी के पढेलेक लिखेलक
बेटी सेहो  मइया के मेहनत के देखैत  मन लगा के दिन रात पढाई केलक
 और आगु बढैत चैलगेल.......
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योनि बापके दारू पी पी के बीमारी भगेल
 आ डाक्टर ल लगेल
डाक्टर  कहलक एकरा टी.बी. भगेल अछि
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एक दिन तबियत बहुत खराब  भगेल आ बेहोशी के हाल में अस्पताल लगेल आ भर्ती करेलक.
दू दिनक बाध ओकर जबे होश ऐल तब डाक्टरनी के चेहरा देखके ओकर होश उइड गेल😳😳

वो डाक्टरनी कोई और नै वल्कि ओकर अपन बेटी छेल..

शर्म सँ पानी पानी बाप कपरा सँ अपन मुह नुकब लागल
और 'कान लागल हाथ जोइड के कहलक: बेटी हमरा माफ कदिय हम तोरा नै समझ सक्लीयो...

साथी बेटी 💎आखिर बेटी अछि
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बाप  के कानैत 😥देख बेटी अपन बाप के गर्दन सँ लगा लेलक.

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साथी गरीबी और अमीरी से कोनो फर्क नै परै छै
बस हौसला होइके चाही ।
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एक दिन बेटी माँ से कहलक: मइया तु हमरा आयतक नै कहलीहि कि हमर हाईस्कूल के भरना  के लेल पैसै कत सँ लबने छेलही?

बेटी के बेर बेर पूछै पर
 मइया जे कहलक से
 उ सुइन के बेटी के देह काइप गेल...

मइया उ अपन शरीर के खून बेच के बेटी के एडमीसन करेंने छेल...

साथी तब त  मइया के भगवान के जेका दर्जा मानल जाय छै
मइया जतेक अपन बेटा-बेटी केलेल  त्याग क सकै छै
ओतेक ई दुनियाँ में कोई और नै..

दू लाइन मइया के लेल::::

गोदी में हमरा सुतेलकै मइया
 प्यार सँ अपन मीठगर बोली से
बेटा कहै के बोलेलकै मइया
हमरा अपन   नरम  गोद मे
प्रीत के झूला झुलेलकै मइया
सब जख्म अपन छाती में लके
सब चोट सँ हमरा बचेलकै मइया
हमर मुरी में कारि टीका लगा के
ऐनक बचपन में हमरा सजेलकै मइया
एहि चेहरा दिखा के हमरा अपन
हमरा रव सँ मिलेलकै मइया
ऐ अशोक तू जे यतेक आगरा के चलै छि,
ई काबिल तोरा बनेलको मइया
 👶👦👧👨👩


लेखकः ✍अशोक कुमार सहनी
लहान ४ रघुनाथपुर
हॉल(दोहा क़तार)

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