पावनिक श्रृंखला दिवाली-
पावनिक श्रृंखला दिवाली-
✍नीरज मिश्र 'मुन्नू'
कार्तिक मासक अमावस्या के दिन दीवाली पावनि मनाओल जाइत छैक । दीवाली एक टा पावनि मात्र नै भ', पावनिक एक टा श्रृंखला थिकै। एहि पर्वक संग पांच टा पर्व जुड़ल रहैत छैक । सभ पवानिक संग दंत-कथा से जुड़ल छैक। ई श्रृंखला दीवाली सँ दू दिन पूर्व आरम्भ भ'अ दू दिनक पश्चात समाप्त होईत अछि।
दीवाली के शुभारंभ कार्तिक मासक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन से होईत अछि। एकरा धनतेरस कहल जाइछ। एहि दिन आरोग्यक देवता धन्वंतरि केर आराधना होइत छैन्ह। धनतेरस दिन नव-नव वासन, आभूषण आदि किनबाक प्रथा अछि। धनतेरस दिन घी केर दीप जरा देवी लक्ष्मी केर आहवान कयल जाईत छैन्ह।
दोसर दिन चतुर्दशी छोटकी दीवाली मनाओल जाइछ। एहि दिन एक टा पुरान दीप में सरिसो तेल व पाँच टा अन्न के दाना राखि एकरा घरक नाली के दिस जरा कय राखल जाइछ। ई दीप यम दीप कहलाइत अछि।
एक टा अन्य दंत-कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण औझुके दिन नरकासुर राक्षसक वध कय ओकरा कारागार सँ १६,००० कन्या के मुक्त करेने छलाह।
तेसर दिन अमावस्या के दीवाली संपूर्ण भारतवर्षक अतिरिक्त विश्व में बसल भारतीय हर्षोल्लासक संग मनबैत छथि। एहि दिन देवी लक्ष्मी आ गणेश पूजा कयल जाइत अछि। ई भिन्न-भिन्न स्थान पर विभिन्न तरीका सँ मनाओल जाइत छैक।
दीवाली के पश्चात अन्नकूट( गोवर्धन पूजा) मनाओल जाइत अछि। ई दीवाली के श्रृंखला में चारीम उत्सव होईत अछि। लोग एहि दिन विभिन्न प्रकारक व्यंजन बना गोवर्धन पूजन करैत छथि।
शुक्ल द्वितीया के भातृद्वितीया के त्योहार मनाओल जाइत छैक। मान्यता छैक कि यदि एहि दिन भाई बहिनक ओहिठाम जा जितिया मनबैत छथि, यमराज के कृपा सँ हुनकर समीप अकाल मृत्यु नै अबैत छैन्ह। ई वरदान यम अपना बहिन यमुना के देंने छलाह।
✍ नीरज मिश्र "मुन्नू"
© संस्कार मिथिला पेज (नव किछु नै, अलग बहुत किछ)
✍नीरज मिश्र 'मुन्नू'
कार्तिक मासक अमावस्या के दिन दीवाली पावनि मनाओल जाइत छैक । दीवाली एक टा पावनि मात्र नै भ', पावनिक एक टा श्रृंखला थिकै। एहि पर्वक संग पांच टा पर्व जुड़ल रहैत छैक । सभ पवानिक संग दंत-कथा से जुड़ल छैक। ई श्रृंखला दीवाली सँ दू दिन पूर्व आरम्भ भ'अ दू दिनक पश्चात समाप्त होईत अछि।
दीवाली के शुभारंभ कार्तिक मासक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन से होईत अछि। एकरा धनतेरस कहल जाइछ। एहि दिन आरोग्यक देवता धन्वंतरि केर आराधना होइत छैन्ह। धनतेरस दिन नव-नव वासन, आभूषण आदि किनबाक प्रथा अछि। धनतेरस दिन घी केर दीप जरा देवी लक्ष्मी केर आहवान कयल जाईत छैन्ह।
दोसर दिन चतुर्दशी छोटकी दीवाली मनाओल जाइछ। एहि दिन एक टा पुरान दीप में सरिसो तेल व पाँच टा अन्न के दाना राखि एकरा घरक नाली के दिस जरा कय राखल जाइछ। ई दीप यम दीप कहलाइत अछि।
एक टा अन्य दंत-कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण औझुके दिन नरकासुर राक्षसक वध कय ओकरा कारागार सँ १६,००० कन्या के मुक्त करेने छलाह।
तेसर दिन अमावस्या के दीवाली संपूर्ण भारतवर्षक अतिरिक्त विश्व में बसल भारतीय हर्षोल्लासक संग मनबैत छथि। एहि दिन देवी लक्ष्मी आ गणेश पूजा कयल जाइत अछि। ई भिन्न-भिन्न स्थान पर विभिन्न तरीका सँ मनाओल जाइत छैक।
दीवाली के पश्चात अन्नकूट( गोवर्धन पूजा) मनाओल जाइत अछि। ई दीवाली के श्रृंखला में चारीम उत्सव होईत अछि। लोग एहि दिन विभिन्न प्रकारक व्यंजन बना गोवर्धन पूजन करैत छथि।
शुक्ल द्वितीया के भातृद्वितीया के त्योहार मनाओल जाइत छैक। मान्यता छैक कि यदि एहि दिन भाई बहिनक ओहिठाम जा जितिया मनबैत छथि, यमराज के कृपा सँ हुनकर समीप अकाल मृत्यु नै अबैत छैन्ह। ई वरदान यम अपना बहिन यमुना के देंने छलाह।
✍ नीरज मिश्र "मुन्नू"
© संस्कार मिथिला पेज (नव किछु नै, अलग बहुत किछ)

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