उपरे झापरे बहैत छलै, उ गहिर भ'गेलै - अप्पन मिथिला -Appanmithila is Maithili Portal for News ,Articles and Entertainment

Breaking News

उपरे झापरे बहैत छलै, उ गहिर भ'गेलै

[ गजल ]

उपरे  झापरे  बहैत   छलै, उ  गहिर  भ'गेलै
यत तँ  देश  गरिब और ,नेता अमिर भ'गेलै

केकरकें  सुनतै  भ्रष्टाचारसँ  भरल  राज्यमे
यत  निचासँ उपर  धरी , सभ  बहिर भ'गेलै

प्रजा अवाजके गाडी सडक प घुरियाइ मुदा
आँउसक  चाउर  भ्रष्टा, दुधसँ  पनिर भ'गेलै

घुस पैठिकें  तहे तहपऽ दलान बनौने छै ओ
बजेट अबै मुदा गाम, बिकास फकिर भ'गेलै

कहिया पाओत छुटकरा जनता अहि सभसँ
भ्रष्टा बाबा आइ  सेहो , समाजक पिर भ'गेलै

✍राम सोगारथ यादब

कोई टिप्पणी नहीं