बुढ़िया दाईक गप्प (बिहनि कथा) - अप्पन मिथिला -Appanmithila is Maithili Portal for News ,Articles and Entertainment

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बुढ़िया दाईक गप्प (बिहनि कथा)

बीहनि कथा :
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बुढ़िया दाईक गप्प🏼
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 लेखकः✍  पारस नाथ मिश्र (अनिल)


उंह.....उंहुंहुंहुं...गे द्दाई गे द्दाssssई . गे द्दाई ..एहन कतौ मनुक्ख भेलैयय ? मार धs कss एहन - एहन मनुक्खकेँ |  जे कनिको लाज- लेहाज नै ...निर्लज्जी सभकेँ |
 यै काकी कीs भेलनिहें ? ..मुजौना वाली कनियाँ ओमहरसँ टोक देलथिन्ह मुदा बुढ़िया दाई कथी लय सूनती | ओ तs तामसे - पित्ते अजाति भेल टुनियाँक आँगन दिस बढ़ल चलि जाईत छलीह | चाहक बेर जे भs गेल छलन्हि | परोच्छक जे बात छैक , टुनियाँक माय बुढ़िया दाईकेँ आदरो - विनो बड़ करैत छन्हि |
  एकटा इएह सब घsर वला - घsर वाली छथि | "हम सुन्नरी कि पिया सुन्नरी, गामक लोक बनरा- बनरी" ||  आर कियो मनुक्खे नहि छैक | काहाँ एना पहिलुका लोक सभ करै छलै , छम्मर- छैंय्याँ छम्मर- छैंय्याँ |
  यै काकी.. की भेलन्हिहें ? किछु कहबो करती कि बड़बड़ाईते रहती बुढ़िया ? ...टुनियाँक माय पुछिते छलीह कि ताबतहिं मे मुजौना वाली कनियाँ सेहो धरामसँ पहुँचि गेलीह.... बुढ़िया नाचय अपने ताले...काकीकेँ पुछैत-पुछैत रहि गेलियनि..नहिं सुनलखिन बुढ़िया | मुजौना वालाक बात पर जेना बुढ़िया दाईकेँ लहरि फूकि दैक ....यै हsss यैsss... चुप्प रहू...आहाँ सभ बड़ वियापक (व्यापक) आ हम सब छी खराप ( खराब) |
  टुनियाँक माय चाहसँ भरल शीशा वला गिलास बुढ़िया दाईकेँ आगाँ मे रखैत बजलीह....पुछिते तs छियनि जे की भलनिहें ?
चाहक गिलास देखितहिं बुढ़िया दाई स्थिर भलीह...कनियोकेँ दियनु ने.... अsssहि नहिं | हँsss दैत छियनि ...कियक नै रहत | ताबतहिं मे छनकावाली सेहो हहाइत-फफाइत अयलीह | ..यै की भेलनिहें काकीकेँ ?
 आबथु बैसथु , किछु नै भेलनिहें काकीकेँ |
 टुनियाँक माय सभगोटें केँ चाहक गिलास दय अपनो एक गिलास लेलीह आ लsग मे आबि पटिया पर बैसि चाह पिबय लगलीह |  बुढ़िया दाईक चाह पिबाक तरीका तs बुझले होयत , नुआक खूटसँ थरथराईत दूनू हाथेँ गिलास केँ कसिकय पकड़ि दू बेर मूँहसँ फूंकब , फेर जोड़सँ सुर्रsss केँ ध्वनिक संग चाहपान करथि | तीनू दियादिनी चुप- चाप चाह पिबै छथि | मुँहा- मुँही तकैत छथि | जखन बुढ़िया दाई बुझलीह जे आब नहि क्यो पुछैत अछि तहन स्वतः शुरू भेलीह ---
   यै कीsss कहू...आई काल्हुक धिया - पुताकेँ ? ..गेलहुँ कनि छोटका बौआ लsग पुछय लेल जे संक्रान्ति कहिया छैक | ताबतहिं मे हुनकर टेगुल (टेबल) पर जे फोन छैक ..से बाजय लगलै | ओ उठा कs पुछलखिन जे के छी | .....मुजौनावाली बाजि उठलीह... कक्कर फोन छलैक ? ..महुआक फोन छलै , झोंझीवला छलै फोन कयने डिल्लीसँ | बुढ़िया दाईक बात खत्तम होयतहिं छनकावाली बाजि उठलीह.... महुआदाईक वssरक सोभाव- पाती बड़ नीक | ...उँssssह भेssने की हेतनि ? कनिक्को लाज- धाख नssहिं | एना निर्लज्ज जकाँ फोन पर बतियइत छलैह जे दलान पर बैसल छलहुँ.. ताँहाँ धरि अवाज जाइत छलैक | बुढ़बा तs उठि कs खरिहानक वाट धयलन्हि आ हsम कान मूनि एमहर विदा भेलहुँ | यै तs  की हेतै काकी ... हिनका सबहक समय मे ई सब कोनो नै होईक ? मुजौनावालीक ई बात सुनितहिं बुढ़िया दाई बाजि उठलीह----
   हमरा सबहक समय मे वियाहक बाद जे वर विदा भय गाम आबय तs फेर दुरांगमने मे सासुर जाय | आब त देखैत छियैक जे जा धरि दुरांगन नहि होईत छैक ता धरि दुआरिक माटि उखेन्ह दैत छैक |....
   अंययै कियक यै ? टुनियाँक माय पूछि देलथिन |
 बुढ़िया दाई स्पष्टीकरण करैत बजलीह --- ताहि दिन मे बेटी-डाटीकेँ सातमे,नौमे, एगरहमे वयस मे वियाह होईत छल | बच्चा रहैत छलैक | तैं वियाहक सातमे , नौमे बेसी स बेसी सोलहम दिन मे वरकेँ विदा होईत छल |
 छनका वाली बाजि उठलीह--- यै काकी... सुनै छियेक जे विदा होयबाक कोनो दिन पतरा मे नहि होईत छैक... सत्तेs  |
  सुनितहिं बुढ़िया दाई बाजि उठलीह--- सयह तs कहैत छी | दुरांगमनक दिन मे विदाक दिन होईत छैक | आ कनियाँक बदला मे कनियाँक हाथक थप्पा वरक संग जाईत छैक जाहिसँ सासुरक लोक ई बुझैत छैक जे कनिया एखन बच्चा छैक |
   उँह... केहन -केहन पहिलुको लोक सब रहैक | एहना मे तs  तहन क्यो सासुर नहि जाईत छलैक होयत ?
टुनियाँ मायक ई बात सुनितहिं बुढ़िया दाईकेँ कतहु रहि होइक ? चट्टहिं बजलीह..... एंह ! जाइते छलैक की | मुदा विधि वेवहार (व्यवहार) पैघ होइत छैक ने ...
  सेs से कोना यै बुढ़िया ?
   ...कानो कान भनकीयो नहि लगैक लोककेँ | ककरो जमाय जे अबथिन तs  राति मे ...जहन लोक -बाग खा - पी कय ओछायन पकड़ि लियये तहन, जे क्यो देखय नहिं | रातिये मे जमायक भोजनक वेवस्था होय |  आ फेर अनरौखें भोरहरिये मे जमाय चलि जाइथ | ने क्यो अबैत देखन्हि आ ने क्यो जाईत |
 प्रतः काल साउस सरबा मे खीर- पुरी लय अगल-बगल केँ वाट -घाट पर फेकि देथिन |
 एकर की मतलब भेलैक यैs बुढ़िया ? मुजौनावाली पुछिये देलथिन्ह |
 अsहूँ बड़ बातकेँ चिड़ैत छी | मुजौनावालीक बातक उत्तर दैत बुढ़िया दाई बजलीह... एकर मतलब ई भेलैक जे अऱोस - परोसक लोक बुझि जाईथ जे राति जमाय आयल छलथिन्ह | भगवानक हाथक बात....जौं कदाचित धियाक खोंईछ -आँचर भरि जाइन तs कोनो लोक-लाज नहि | आबक लोककेँ ताहि सबहक कोन भय छैक | आब तs देखै छियेक जे चारि दिन चतुर्थियो नहि बारैत छैक |
         टुनियाँक माय तेसुत्ता बनयबाक हेतु सूतक मोटरी बीच मे रखैत बजलीह...... ई चारि दिनक की मतलब ?
       बुढ़िया दाई आँखि गुर्रैत -... चारि दिनक मतलब जे जौं वरकेँ कोनो बिमारी हेतैक तs से बुझय मे आबि जायत | वेद मंत्रसँ जे अभिमंत्रित भेल छथि कनियाँ से चारि दिन पर्यन्त गौड़ी पूजन करतीह | पाणिग्रहण भेल अछि तैं धोबिनियाँक सोहाग मथलाक बाद गृहस्थ जीवन मे प्रवेश करतीह | आबक लोककेँ से विचार छैक ?
  बाsप रे बाssप ! ताहू दिनक लोकक सोच कतेक पैघ रहैक | आश्चर्यसँ भरल शब्द छनकावालीक मुँह सँ अकस्मात निकलि गेलन्हि |
  ..गे बाबू  ! कोना ने रहौक ?
बुढ़िया दाईकेँ जुवाने पर सबहक उदहरण रखल |....
  भरदुतिया मे रुपैठावाली भाड़ साँठि कय भड़ियाक संग बेटाकेँ पठौलन्हि बहिनिक गाम न्योत लेबाक हेतु | तs ई कोन बड़ भारीक बात भेलैक | मायक शौख ! मोटरा-मोटरी नहिं तs भाड़े साँठि देलन्हि | छनका वाली छनकि उठलीह |
       हँsss यैsss ...बहिन वाट जोहिते रहि गेलीह भैयाकेँ | बीच रास्ता मे गेलाक बाद भड़ियाकेँ कहखिन्ह जे तों आगाँ बढ़ह, हम अपन दोस्तकेँ भेंट कय अबैत छी |  भड़िया पहुँचि गेल | बहिन पुछथिन जे हौ हमर भैया कतय रहि गेलाह ? हैss ओ तs हमरा कहलन्हि जे तों आगाँ बढ़ह, हम अबैत छी दोस्तकेँ भेंट कयने | भड़िय जलखैयो कयलक, विदाइयो लs कs लौटियो आयल | मुदा भैया न्योत लेबाक हेतु नहि पहुँलाह |
       तहन फेर की भेलैक यै काकी? भरदुतियाक दिन , साँझो धरि नहि गेलखिन्ह ?टुनियाँक माय अपन मुँह खोललीह |
  उँsssssssह ! बहिन वाटे तकैत रहि गेलीह भैयाकेँ आ भाई चलि गेलाह अप्पन सासुर|
    बुढ़िया दाईकेँ ई बात बजितहिं मुजौनावाली मुँह केँ आँचरसँ झँपैत. बजलीह.... एेंयै कssहू  तssssss !  एहनो कतौ भेलैय ! फेर की भेलैक ?
       की हेतैक , रुपैठावालीक पुतोहुकेँ मैया खोंईछ भरि देल थिन | दु-चारि मासक बाद समधिन समाद पठा कहलबौलखिन जे यै समधिन, हमरा हिनकासँ भेंट करबाक अछि | फेर भेंट- घाँट भेलनि | ई कहथिन जे हमर बेटा सासुर गेबहि नहिं कयल | तहन समधिन कहलखिन जे ....यै समधिन ...हिनकर बेटा भरदुतिया मे आयल ऱहथिन | फेर मान - मनौअल भेल |
सुआईत लोक सरबा मे खीर-पूरी फेकि दैक | कहि मुजौनावाली जोरसँ हँसय लगलीह |
   साँझ-बाती लेसयक बेर भs चुकल छल | बुढ़िया दाईक गप्प मे जनेऊक तेसुत सेहो तैयार भय चुकल छल | सभक्यों अपन-अपन घर - आँगन विदा भेलीह जे बुढ़िया काकी ...हिनकासँ बहुतरास पुरनका बात सभ सुनबाक बाँकी अछि | फेर कहियो ........
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क्षमा = एहि वार्तालाप मे नाम-गाम सभ काल्पनिक अछि तथापि जौं किनकोसँ किछु संलग्न होय तs  क्षमा करब |🏼
 पारस नाथ मिश्र (अनिल)
 जरैल (गाछी टोल)

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