कवि मधुबनीयाँ
कवि मधुबनियाँ
✍राजीव कर्ण
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किछुओ करय ई दुनिया
बजाबी हम हरमुनियाँ
धिया पुता जँ तंग करैये
दै छी खूब गरदनियाँ।
भोरे भोरे सुइत उइठ क
रोज गबय छी भैरव राग
के सुनइए तान हमर ई
जीवन भ गेल राग बिहाग
मोनक बात जँ करी किछु
त खूब डटई छैथ कनियाँ।
हरफन मौला मोन हमर
आ मस्त रहै छी मस्ती में
दू चारि टा दोस हमर छैथ
घुमी हुनकर बस्ती में
कोई कहैथ गवैया हमरा
कोई कवि मधुबनियाँ।
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✍राजीव कर्ण।
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| राजीव कर्ण |
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किछुओ करय ई दुनिया
बजाबी हम हरमुनियाँ
धिया पुता जँ तंग करैये
दै छी खूब गरदनियाँ।
भोरे भोरे सुइत उइठ क
रोज गबय छी भैरव राग
के सुनइए तान हमर ई
जीवन भ गेल राग बिहाग
मोनक बात जँ करी किछु
त खूब डटई छैथ कनियाँ।
हरफन मौला मोन हमर
आ मस्त रहै छी मस्ती में
दू चारि टा दोस हमर छैथ
घुमी हुनकर बस्ती में
कोई कहैथ गवैया हमरा
कोई कवि मधुबनियाँ।
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✍राजीव कर्ण।

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