दियावाती _सुकराति_भरदुतिया
दीपावली-सुकराती-भरदुतिया
✒✍प्रवीण नारायण चौधरी
ऊक्का लोली लोली लोली!
भरथि प्रभु खुशी सऽ सभके झोली!
मिलिजुलि सभ दिस स्वच्छ बनाबू-२
स्वागत करू सुर टोली!
ऊक्का लोली लोली लोली!
भरथि प्रभु खुशी सऽ सभके झोली!
मिलिजुलि सभ दिस स्वच्छ बनाबू-२
स्वागत करू सुर टोली!
ऊक्का लोली लोली लोली!
काम-क्रोध के दीप जराबू, अहंकार के तेल।
मद-मोहक सभ अग्नि समर्पित-२,
खेलू खुशीके होली!
ऊक्का लोली लोली लोली!
मद-मोहक सभ अग्नि समर्पित-२,
खेलू खुशीके होली!
ऊक्का लोली लोली लोली!
आपकीर्त सभ पाप नष्ट हो, करू समर्पण आइयो।
पुनः शपथ कर्मठता खातिर -२
मारू लोभ के गोली!
ऊक्का लोली लोली लोली!
पुनः शपथ कर्मठता खातिर -२
मारू लोभ के गोली!
ऊक्का लोली लोली लोली!
पशु पावैन कय प्रेम के सनेश जानू यौ सभ मानुख।
ईशके सृष्टि अन्योन्याश्रय-२
बाजू मीठहि बोली!
ऊक्का लोली लोली लोली!
ईशके सृष्टि अन्योन्याश्रय-२
बाजू मीठहि बोली!
ऊक्का लोली लोली लोली!
बहिन भाइ लेल आशीष माँगथि भरदुतिया इ सुन्दर।
अहुँ जन्म के मोल बुझब यौ-२
बनब सेवक के टोली!
ऊक्का लोली लोली लोली!
अहुँ जन्म के मोल बुझब यौ-२
बनब सेवक के टोली!
ऊक्का लोली लोली लोली!
मिथिला माय के कोखि सऽ जन्मल सुनु यौ मैथिल मित।
छथि कानैथ जँ माय हमर आइ-२
जुनि भरु झूठ रंगोली!
ऊक्का लोली लोली लोली!
छथि कानैथ जँ माय हमर आइ-२
जुनि भरु झूठ रंगोली!
ऊक्का लोली लोली लोली!
✒✍प्रवीण नारायण चौधरी
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