हे गे ललमुनिया तों नचबै छें दुनिया
हे गे ललमुनिया तों नचबै छें दुनिया
✍शिव कुमार झा टिल्लू
हे गे ललमुनिया
तों नचबै छें दुनिया
तों नचबै छें दुनिया
तोरे संग प्रेमक सगुनिया गे..
हे रे ललबबुआ
तों गामक अगिलगुआ
तों गामक अगिलगुआ
नहि बजितौ नेहक हरमुनिया रे ...
हिरणी चालि पोरे पोरकेँ डोलाबौ
आहि सिनेही मोन रस टपकाबौ
रूपक गुमकीमे अपने जड़ै छें
डोलबें हम शीतल टुनटुनिया गे.......
लाज ने धाख तोरा हे रौ अभोगिया
एहि जनममे ने भेंटबौ रे जोगिया
भेखे देख क' भीखो भेंटै छै
सुपती सन मुंह देह कोनिया रे ........
रंग रूप नहि हम्मर अरजलि
देखिहें एकदिन दौड़बें गरजलि
नव शिक्षा संग घुरब जाहि दिन
ओहि दिन पछतेबें तो चुनिया गे ........
कर्मक धमकी ककरा रौ छौंड़ा
हमरा लेल त' बिहाड़ियो गेल बौरा
तोरा सन गली कूची बौआबय
नहि छोट मिथिलाक दुनिया रे .....
✍शिव कुमार झा टिल्लु
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