बड महग परल सिन्दुर कंगना (गुहार)
" गुहार"
✍सुबोध चौधरी
बड महग परल सिन्दुर कंगना !
छुटल नैहर और पीता के अंगना !!
बिखरल नेहक पुष्प सोहरल !
टुटल सब टा स्वप्न संयोजल !!
मैयाँ के आँचर छोडु केना !
छुटल पिता के अंगना !!
निभुत चन्चल दिबस मनभाबन !
बीतल क्षण वो पुलकित पाबन !!
बन्छित कथी केहन बिधाता !
छुटल नैहर पिताक अंगना !!
मोन परैय सब सखी सहेली !
टोला मुहल्ला होरि धुर्खेल्ली !!
पैरक बेरि सासुरक गहना !
छुटल नैहर पिताक अंगना !!
इ देख नियतिक आ मनुखक !
धिये किया पात्र बनै दु:खक!!
सुबोध हृदय रची रचना!
छुटल नैहर पिताक अंगना !!
रचना ✍सुबोध चौधरी
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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✍सुबोध चौधरी
बड महग परल सिन्दुर कंगना !
छुटल नैहर और पीता के अंगना !!
बिखरल नेहक पुष्प सोहरल !
टुटल सब टा स्वप्न संयोजल !!
मैयाँ के आँचर छोडु केना !
छुटल पिता के अंगना !!
निभुत चन्चल दिबस मनभाबन !
बीतल क्षण वो पुलकित पाबन !!
बन्छित कथी केहन बिधाता !
छुटल नैहर पिताक अंगना !!
मोन परैय सब सखी सहेली !
टोला मुहल्ला होरि धुर्खेल्ली !!
पैरक बेरि सासुरक गहना !
छुटल नैहर पिताक अंगना !!
इ देख नियतिक आ मनुखक !
धिये किया पात्र बनै दु:खक!!
सुबोध हृदय रची रचना!
छुटल नैहर पिताक अंगना !!
रचना ✍सुबोध चौधरी
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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