छठ पावैन में चलै चलु अप्पन गाम - अप्पन मिथिला -Appanmithila is Maithili Portal for News ,Articles and Entertainment

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छठ पावैन में चलै चलु अप्पन गाम

........... छठि पूजा .........

छठि मइया"क पावइन एलै,
चलै चलु अप्पन गाम।
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गाम'क पोखइर में घाट बनेबै,
छठि पावइन गामें में मनेबै।
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अॉफिस में छुट्टी'क मारा- मारी,
अपन मिथिला' छैठ पूजा बड़ भारी।
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टीशन'क भीड़ देखी माथ चकरायल,
सारहे नौ घंटा विलम्ब सँ शहीद पकरायल।
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बाट में पिछुलका छइठ याद अबैया,
कतेको सहयात्री छठिक गीत गबैया।
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ठारहे-ठार पहुँचलौं अप्पन गाम,
डीहबार,गोसाउनि आ श्रेष्टजन कयलौं प्रणाम।
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गाम में छठि पूजा'क उत्साह देखिते बनै छै,
बहिन,भौजी समा गीत गबिते माटि सनै छै।
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सुप,नारियल किनल बाबा हाट सँ,
ढाकी बिनल बिन्दे अपन हाथ सँ।
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लाल भौजी कुसियार काटल,
बड़की काकी टोल भरि टाभनेबो बाटल।
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ठकुआ ठोकल बुरहिया दाय,
भुसबा ठोकल बड़की माय।
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ओम्हर भइयारी सब,
घाट सजेलक रंग- बिरंग चमकी आ मोती सँ।
एम्हर दाय माय सब,
ढाकी- कनसुपती बन्हलक लाले-पीयर धोती सँ।।
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कक्का माथ टोकरी,
बहिन कांख कोसिया कुरवार।
बौआ-बुच्ची हाथ फटक्का,
छइठ घाट चलल सपरिवार।।
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धीरे धीरे सब पहुँच रहलाह,
एक बेर राखि दोबारा लाबय गेलाह।
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चकमक चकमक दीप नीक लगै छै,
अहि घाट  सब भरि राति जगै छै।
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घाट'क चारू कात बती जरै छै,
जेना घाट राइतो में दिन लगै छै।
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भोरका अरघ'क कखन हैत बेर,
हे दिनानाथ कते' समय लगैब अहिबेर।
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कतेक निन सुतल छी,
सुरूज देव जागु ने।
भेलै भोर हो दीनानाथ
जल्दी सँ उगु ने।।
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पवनैतिन पाइन थर-थर कापथि,
स्त्रीगण लौकैन यैह गीत सब गाबथि।
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सुरुज देव'क दर्शन भेल,
उगैत सुरुज के सेहो अरघ देल।
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एहि तरह छइठ पूजा कयल अप्पन गाम,
मोहनो कयल छठि मइया'क प्रणाम।
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मैथिल जनभरि बरख रहि कौनो परदेश,
छइठ पूजा में जरूर पहुँची अप्पन मिथिला प्रदेश।

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जय मिथिला
जय मैथिली
जय छठि मइया।
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#छठि_पूजा_केर_शुभकामनाक_संग
रचना✍Mohan Bhardwaj

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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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