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मिथला में छैठक खरना पावैन

मिथला में छैठक खरना पावैन
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     छैठिक व्रती भरिदिन निराहार रहि साँझखन पवित्र बासन में गूड़खीर बना भगवती गोसाऊनक आगाँ नैवेद्य अर्पण कऽ कुमारि कन्या आ स्वयं भोजन ग्रहण करै छथि आ अंगना अंगना सौं आयल पावैनक हकार पुरनिहारि सखी बहिनपा आ धियापुता के प्रसाद सेहो दैत छथि।सब बड पैघ सौभाग्य बुझि प्रसाद ग्रहण करै छथि।खरनाक बाद व्रती फेर छैठक पारणाक बादे कीछु ग्रहण करती।प्रणम्य छथि।।।


                        पुरूष लोकनि निकटक हाट जाई छूटल-बढल सामान आनि छैठ परमेश्वरी पावैन, जाहि में बहुत तरहक सामग्री के ओरियान करऽ परै छैक।पकवान ते प्रातभेने पकवे करै छैक आरो बहुत रास ओरियान जतेक श्रद्धा आ जेहन कोवला तेहन सामग्रीक विधान।नवयुवक सब घाटक सफाई में लागल रहैत छथि।धियापुता सब खन अंगना त खन घाट।अति उत्साह!

साभार - मिथिला पेज

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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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