💐 बीहनि कथा (अभियंता नहि मजूर)
💐 बीहनि कथा
🐚 अभियंता नहि मजूर
✍👤 वी०सी०झा"बमबम
~ माय गऽई आय लवान छियै कि ? बड़का कक्का बजय छलखिन !
~ हं रउ बउआ , से तऽ कहबे नहि केलियहु ! तोरो दू मूठ्ठी नवका धान काटि कऽ आनऽ परतौक !
~ हमरा बूते इ काज सब नहि होय बला छउ से बुझि लहि !
~ नय - नय से कोना हेतऽ ? इ विधि होइत छैइक ! ओ तऽ लाबहे परतऽ !
~ गऽई माई हम इंजिनियर छी कोनो मजूर नहि जे हर दऽ खेत जाय धान काटि आनव ! हम एकटा अभियंता भऽ हाँसू लऽ खेतक आड़ि पर जायब तऽ गामक लोक कि कहत ? हमरा संऽ संभव नहि छउ ! बड़के कक्का कऽ कहुन अपन अनथुन जा'क !
~ रउ बउआ इंजियरो भ'क तऽ दोसर'क चाकरी करैते छऽ ! आ जे दोसरक चाकरी करैत अछि से मजूरे कहाइत अछि चाहे ओ कोनो काज करौ ने ! आ जे अपन काज करय य ओ मालिके कहाय अछि ! आ इ जे आय तों इंजियर छऽ से एहि खेतक आड़ि'क बदोलत कि बुझलक ? जा जा - - - हमरा लग कने कम इंजियरी झारह ! आनि लेथिन अपनहि जा'क , बुढ़ो भेलखिन तऽ तोहर खुसामद नहि छहि ! तोरा सन पढ़ल - लिखल बेटा सऽ मूर्खे नीक जे कम सऽ कम माय - बापक पीठ लागल तऽ रहय छय !
~ गऽई माय आय हमरहु भक्क फूजि गेल सत्तें तोंऽ कहलें ! ला हाँसू - - - -
( माय चूटकी लैत )
~ नय नय अहाँ कतय जायव खेत - पथार ? अहाँ तऽ इंजियर छी ! एंह लोक कि कहत बाउ ?
( बउआ ता हाँसू लऽ खेत दिस विदा भऽ गेल छलाह )
✍👤 वी०सी०झा"बमबम"
कैथिनियाँ
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पोस्ट:- अशोक कुमार सहनी
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🐚 अभियंता नहि मजूर
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| धान कटनी |
✍👤 वी०सी०झा"बमबम
~ माय गऽई आय लवान छियै कि ? बड़का कक्का बजय छलखिन !
~ हं रउ बउआ , से तऽ कहबे नहि केलियहु ! तोरो दू मूठ्ठी नवका धान काटि कऽ आनऽ परतौक !
~ हमरा बूते इ काज सब नहि होय बला छउ से बुझि लहि !
~ नय - नय से कोना हेतऽ ? इ विधि होइत छैइक ! ओ तऽ लाबहे परतऽ !
~ गऽई माई हम इंजिनियर छी कोनो मजूर नहि जे हर दऽ खेत जाय धान काटि आनव ! हम एकटा अभियंता भऽ हाँसू लऽ खेतक आड़ि पर जायब तऽ गामक लोक कि कहत ? हमरा संऽ संभव नहि छउ ! बड़के कक्का कऽ कहुन अपन अनथुन जा'क !
~ रउ बउआ इंजियरो भ'क तऽ दोसर'क चाकरी करैते छऽ ! आ जे दोसरक चाकरी करैत अछि से मजूरे कहाइत अछि चाहे ओ कोनो काज करौ ने ! आ जे अपन काज करय य ओ मालिके कहाय अछि ! आ इ जे आय तों इंजियर छऽ से एहि खेतक आड़ि'क बदोलत कि बुझलक ? जा जा - - - हमरा लग कने कम इंजियरी झारह ! आनि लेथिन अपनहि जा'क , बुढ़ो भेलखिन तऽ तोहर खुसामद नहि छहि ! तोरा सन पढ़ल - लिखल बेटा सऽ मूर्खे नीक जे कम सऽ कम माय - बापक पीठ लागल तऽ रहय छय !
~ गऽई माय आय हमरहु भक्क फूजि गेल सत्तें तोंऽ कहलें ! ला हाँसू - - - -
( माय चूटकी लैत )
~ नय नय अहाँ कतय जायव खेत - पथार ? अहाँ तऽ इंजियर छी ! एंह लोक कि कहत बाउ ?
( बउआ ता हाँसू लऽ खेत दिस विदा भऽ गेल छलाह )
![]() |
| लेखकः✍ Vidhya chandra jha |
✍👤 वी०सी०झा"बमबम"
कैथिनियाँ
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पोस्ट:- अशोक कुमार सहनी
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