।।मैथिलि गजल दहेज ।।
।।मैथिलि गजल दहेज ।।
✍👤अशोक कुमार सहनी
एक अन्चिनहारसँ
दहेजक बड भारसँ
बियाही देलखिं हमरा
एक अनपढ गबारसँ
रिति इ केहन दहेजक
जुडल अछि तारे तारसँ
घायल भ'गेलैं बाबू जी
दहेजक चोखगर धारसँ
हम बुझैलियै मनकें मुदा
नता जोडिऐ लेलकै रसि आ चारसँ
👤✍ 'अशोक कुमार सहनी'
लहान-४ रहुनाथपुर
हाल - (दोहा कतार)
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पोस्ट:- अशोक कुमार सहनी
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