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कन्यादान महादान

कन्या दान
कन्यादान महादान
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        दानक अपन सनातन धर्म में बहुत पैघ माहात्म्य। राजा बलि अपन सर्वस्व दान कय जहाँ तक अपन शरीरो तक भगवान बामन के दान कय देलथि। तैं भगवान विष्णु एखन धरि पातालपुरी में बलिक दरवान छथि।
                    राधेय पुत्र कर्ण अपन प्राणरक्षक कवचकुण्डल दान कय दानवीर कर्ण भय गेलाह।
          कन्यादान सबसौं परे आ अति उत्तम कोटिक दान। कोनो आन दान में दानकर्ताक ओही दान केल वस्तु पर सौं अधिकार खत्म भ जाई छैक। किन्तु कन्यादान केला सौं पिता के पुत्री पर सौं अधिकार खत्म ननहिं होई छैक।दान लेनिहार पति होई छथिन। कन्या(पुत्री) त दानकर्ता पिताक रैहिए जाई छनि किएक त कन्या कोनो वस्तु नहिं छथि ओ त स्वयं लक्ष्मीक स्वरूप छथि।संसारक सबसौं सौभाग्यशाली वेह छथि जिनका घर कन्या उत्पन्न होई छनि आ कन्यादानक सौभाग्य प्राप्त होई छनि किएक त कन्याक जन्म सौं दू टा कुलक उद्धार होई छैक एकटा पिताक कुल दोसर पतिक कुल।
                      कतेक एहन लोक छथि जिनका घर में कन्या नहिं छनि हुनका पर भगवतीक कृपा कम छनि तें ओ अहि सुख सौं वंचित रहै छथि आ कन्यादानक लेल लालायित रहैत छथि।
                       किछु एहन बुद्धिजीवी छथि जे भगवती कृपा आ सौभाग्यशाली होमक लेल दोसरक पुत्री के याचना कय कन्यादानक सौभाग्य प्राप्त करै छथि।

जिनका पर जगदम्बाक असीम कृपा
हुनके घर कन्या जन्म!

साभार :- मिथिला पेज



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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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