जनमो जनम हम मैथिल कहाबी
● गजल ●
जनमो जनम हम मैथिल कहाबी
✍👤विद्यानन्द वेदर्दी
मिथिलाक माटि छाती सँ लगाबी,अभिलाषा हमरा
जनमो जनम हम मैथिल कहाबी,अभिलाषा हमरा॥
धोती, कुर्ता, गमछा कतेक सोहाओन परिधान?
पाग-पगरी सँ शिरकेर सजाबी,अभिलाषा हमरा॥
जगकेर सब सँ मिठ्ठ मनोहर मैथिली भाषा,
बाजी-पढी- लिखी आ गाबी, अभिलाषा हमरा॥
विद्यापति,लोरिक,सलहेस,जानकी, दिनाभद्रीक,
सगर दुनियामे गरिमा सुनाबी,अभिलाषा हमरा॥
मिथिलाकेर झण्डा दूर आसमानमे सदति,
वीर- अटल भकऽ फहराबी, अभिलाषा हमरा॥
प्राण निछावर कऽ मिथिला राज्यकेर खातीर,
शोणित एक-एक बुनँ बहाबी,अभिलाषा हमरा॥
______________________
✍👤 विद्यानन्द वेदर्दी
राजविराज ,सप्तरी (नेपाल)
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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जनमो जनम हम मैथिल कहाबी
✍👤विद्यानन्द वेदर्दी
मिथिलाक माटि छाती सँ लगाबी,अभिलाषा हमरा
जनमो जनम हम मैथिल कहाबी,अभिलाषा हमरा॥
धोती, कुर्ता, गमछा कतेक सोहाओन परिधान?
पाग-पगरी सँ शिरकेर सजाबी,अभिलाषा हमरा॥
जगकेर सब सँ मिठ्ठ मनोहर मैथिली भाषा,
बाजी-पढी- लिखी आ गाबी, अभिलाषा हमरा॥
विद्यापति,लोरिक,सलहेस,जानकी, दिनाभद्रीक,
सगर दुनियामे गरिमा सुनाबी,अभिलाषा हमरा॥
मिथिलाकेर झण्डा दूर आसमानमे सदति,
वीर- अटल भकऽ फहराबी, अभिलाषा हमरा॥
प्राण निछावर कऽ मिथिला राज्यकेर खातीर,
शोणित एक-एक बुनँ बहाबी,अभिलाषा हमरा॥
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✍👤 विद्यानन्द वेदर्दी
राजविराज ,सप्तरी (नेपाल)
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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