मनमे काँट
[ मनमे काँट ]
✍👤धनेश्वर ठाकुर
अहाँ फुल बनिक
हमरा मनक फुलबारीमे
महकैत छली
हमरा मन मस्तिष्कमे
सदिखन
बिहुसैत छली
हमहुँ अहाँक प्रेममे पागल
अहिके यादमे
प्रेमक मठा घोलैत छली
भेरे अहिक नाम
साँझपहर अहिक नामलँ
मन मुस्कबैत छली
हमरा याद अछि उ दिन
फस्ट जनवरिक पिकनिक
मनैने छली अहाँक संग
धनुषा धामकेर परतिप
आ किरिया खैने छली
प्रेमक प्रतिक धनुष मंन्दिरमे
जाक
जनम जनम धैर साथ रहबाक
सायत अहाँक मुस्कैत ठोर
हमरा कहैत छल
इ किरिया झुठ अछि
मुदा हम अहाँक प्रेममे पागल
अहाँक मुस्कि देख आरो
हमर छाती फुलैत छल
आई ठिक एक साल वाद
जखन अहाँके देख रहल छी
किन्को हाथमे हाथ ध
ओह जगहप पिकनिक मनाबै तँ
हम बुझिपडलहुँ
अहाँके हमरासँ प्रेम नहि छल
हमरा पैसासँ अहाँके प्रेम छल
..........
✍ धनेश्वर ठाकुर
धनुषा धाम 4 लक्ष्मीपुर
हाल मरूभुमी देश
दोहा कतार
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
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✍👤धनेश्वर ठाकुर
अहाँ फुल बनिक
हमरा मनक फुलबारीमे
महकैत छली
हमरा मन मस्तिष्कमे
सदिखन
बिहुसैत छली
हमहुँ अहाँक प्रेममे पागल
अहिके यादमे
प्रेमक मठा घोलैत छली
भेरे अहिक नाम
साँझपहर अहिक नामलँ
मन मुस्कबैत छली
हमरा याद अछि उ दिन
फस्ट जनवरिक पिकनिक
मनैने छली अहाँक संग
धनुषा धामकेर परतिप
आ किरिया खैने छली
प्रेमक प्रतिक धनुष मंन्दिरमे
जाक
जनम जनम धैर साथ रहबाक
सायत अहाँक मुस्कैत ठोर
हमरा कहैत छल
इ किरिया झुठ अछि
मुदा हम अहाँक प्रेममे पागल
अहाँक मुस्कि देख आरो
हमर छाती फुलैत छल
आई ठिक एक साल वाद
जखन अहाँके देख रहल छी
किन्को हाथमे हाथ ध
ओह जगहप पिकनिक मनाबै तँ
हम बुझिपडलहुँ
अहाँके हमरासँ प्रेम नहि छल
हमरा पैसासँ अहाँके प्रेम छल
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✍ धनेश्वर ठाकुर
धनुषा धाम 4 लक्ष्मीपुर
हाल मरूभुमी देश
दोहा कतार
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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