"एक दुल्हन एहनो "
।।"एक दुल्हन एहनो "।।
✍👤अशोक कुमार सहनी
ओना तँ हम सब अपन आगु पाछु औरत के देख रहल छी सब घर में औरत कोनो ने कोनो रूप में अखून अछि । फेसबुक में औरत अपन सोच , अपने विचारे टा नै अपन भिडियो आ अपन रूप के साथ में अछि । मुदा आय एक एहेन औरत के कहानी लके हम अहाँ सबल ऐल छी जेकरा हम एक नया रूप में देखली ।
वर्षों बीत गेल जब उ कुमारी छेल विवाह कके ऐल तँ ओकर रूप के चर्चा चारुतरफ छेल । हुइज के हुइज औरतसब सब दिन देखैलेल आबै छेल ओकर ठाड़ नाक देखके कोई कहैय छेल " प्लास्टिक सर्जरी करैने अछि , तँ कोई ओकर गुलाबी रंगक के देखके पूछैय " कौन कम्पनी के पाउडर लगाबै छी भौउजी ".अंत यही निष्कर्ष निकालै छेल की "कनियाँ बहुत सुन्नर अछि ".
विवाह भेल तँ परिवार संयुक्त छेल भरल पूरल परिवार के पहिलका सुन्नर दुल्हन सास ससुर हिर्दय जान सँ चाहै छेल मुदा पति , हाय रे दुनिया ! राति के घर आबै छेल तँ जेबि में लम्बा लम्बा प्रेम पत्र ठूँसल रहैय छेल । बेचारी दुल्हन परछाही के अपन नसीब समझै छेल । ओनाहितों मर्द के प्रेम करैके लेल तालीम के जरूरि पड़ै छै शायद ।
उ चमकैत दुल्हन के किस्मत में अनचेक में एक कारि दिन आबै क वैसगेल जब लहान के कैम्पस में पैइढ़रहल देवर के पैर टुइट गेल । देवर के टूटल टाँग मुदा चोट दुल्हन के छाती पर लागल जेना मौत भरहल अछि । गामक औरतसब कंफुसकी करलागल छेल " कनियाँ बियाह के एल तब ई सब भेल , पहिले तँ कुछुओ नै घर में होइ छेल " मुदा वाह रे ससुर , दुल्हन के पक्छ में खडा भगेल " हमरा पुतोह के कोई कीछ नै कहि सकैछी " .
समय बितैत गेल दुल्हन दु टा बच्चा के माय बैन गेल कतेक ननद देवर के शादी भगेल चचेरी देवरानी जेठानी बैन के रहैय छेल मुदा बेचारी बड़की दुल्हन मुँह नै खोललक ।
दुःखक पहाड़ तँ जब परल ओकर पति के लहानमें भेल आंदोलन के टाइम दुनु हाथ चोट सँ नै काम करै छेल आ आँखि में शीशे के टुकड़ पड़ै गेल देहक कुर्ता खून सँ पोतम पोत छेल पति के काठमाण्डू लगेल ओकर जान बैच गेल मुदा बाद में दुल्हन उ केलक जे एक माय सोइरीघर में अपन बच्चा के नै करै सकै अछि । पति के दुनु हाथ में पट्टी छेल , आँखि में सेहो छेल पट्टी . उ अपन पति के झारा-पिसाब सँ , मुँह धोधा, अस्नान और समय में दवाई देक दुल्हन माय बैन गेल छेल । आ बेटा के माय मूख दर्शक बैन के आशीष के फुहारा मात्र दै छेल ।
समय कुछ और आगु बढ़ैत गेल कि एक दिन सास बाथरूम में गिर गेल। आ टाँग के हड्डी छिटैक गेल , सास बिस्तर पकैड लेलखिन .बेटा, पुतोह सँ भरल घर मुदा ई दुःखक सयम में सब साइड लैग गेल। बड़की दुल्हन चुप-चाप सब झेलैत गेल सास बस एहि कहैत "ओही जनम में तू हमर कर्जा खेने रहि वोही सँ ऐहि जनम में पुतोह बैंनके येल्ही ", तू हमर जान छी कनियाँ "।
यत तक तँ ठीक छेल मुदा काल्हि जे भेल यही हमर सब्र के बाँध तौड़ देलक और हमर कलम लिखै लेल मजबूर भेगेल राति के टाइम ससुर के गाय धक्का देलक ससुर गिर गेल और कुल्हा के हड्डी छीटैंक गेल आ बिस्तर पकैड लेलक बेटा भतीजा सँ भरा घर मुदा सब धीरे धीरे सँ घुसैक गेल एहो बेरी बड़की दुल्हन बेटी बैन ससुर के आगु आगेल ससुर के आँखि सँ आँसू रूकै के नाम नै लैय छेल, साथ में दुल्हन सेहो नैन सँ नीर वहाँ रहल छेल. मित्र, ओहि आँसू आय अशोक के कलम सँ स्याही बैन के लिखल गेल अछि कहानी ।।
✍👤अशोक कुमार सहनी
लहान ४ रघुनाथपुर
हाल(दोहा क़तार)
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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