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वन्दोवस तखने हम तऽ बरात कऽ ली

वन्दोवस तखने हम तऽ बरात कऽ ली



✍👤विधानन्द वेदर्दी 

सभक सामनेमे नै प्रिये,काते कात कऽ ली
मोन होईय भरि मोन, मोनक बात कऽ ली॥

वाण चलतै जौ मज्जा किछ आओर एतै,
नजरे नजरि सँ प्रेमकेर शुरूवात कऽ ली॥

अहाँ विनु लगैए झलमल अन्हार सगरो,
अइ जीवनमे आनि अहाँके,प्रात कऽ ली॥

जखने विआहक लेल कहबै एको बेर,
वन्दोवस तखने हम तऽ बरात कऽ ली॥

अहाँ खातीर नै पुछु कि-कि करि सकब,
अपन साँसो सँ विश्वास घात कऽ ली॥
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✍👤विद्यानन्द वेदर्दी
  सप्तरी,राजविराज
  हाल: विराटनगर,मोरङ्ग
  » 2073/08/20


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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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