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अहाँकेर मोहिनी रूपक प्रिये

!प्रेमगीत !

✍👤शिव कुमार झा "टिल्लू"

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अहाँकेर मोहिनी रूपक प्रिये हम एक पुजारी छी 
देखल डबडब नयन हमरा कहू की अति अभारी छी !

विरहकेर थार सन बनलै जखन सच जीवनक हेरल 
एखन अवसान अछि वयसक सोहल नेहक शिकारी छी !

देखबने' फेर ककरोदिश मोनक श्रृंगार उड़ि जेतै 
कहब की आर हम प्रियतम चाखू मोहक सुपारी छी !

विरहके' भान नहि हमरा सरसरंग नीतिमे हेरल 
जखन सौंदर्यके' तकलहुँ तखन कोकिल श्रृंगारी छी !

अलखमे आब जड़ि जेतै नवलसन नेहके' पुरहरि
माँगल नहि आइधरि किछुओ एखन प्रेमक भिखारी छी !

अहींकेर रूप दर्पणमे कतेकबेरि पोछिक' देखलहुँ 
शिवक ई नाह नहि डूबय हे चलू हम लोक पहाड़ी छी !


गीतकार:-✍शिव कुमार झा "टिल्लू"

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पोस्ट:- अशोक कुमार सहनी
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