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नव वर्ख -- नवल प्रण !

नव वर्ख -- नवल प्रण !



शिव कुमार झा टिल्लू 
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चलू बसब प्रेमक फुलबारी 
अपने हाथसँ फूल लगेबै 
अरारिक संग बहुतदिन कटलै
नव नेहक आनंद उठेबै...
कतेक दिवस ई जीवन बाँचल 
तकर बाद कत' अहाँ कत' हम ?
अनुरागी स्मृति'के संग -संग 
होयत छोह मुदा मन गमगम 
एहिठां धरि संबंधक परिभाषा 
उपरक  बाट एकसरे खुजै छै 
भरल पुरल जाइ ओकरे आत्मा 
जकरा हिय संतोख बसै छै 
खुशीक संग नव वर्ख मनायब 
ध्यान देबै एक साल घटल छै 
जलप्रपात दिशि घुरि क' ताकू 
अपन अंशमे कतेक बचल छै !
आनक मोनकेँ बहुत दुखेलहुँ
आब'ने ककरो हीया जड़ेबै
प्रेमक धार जौं बहा सकब नहि
दुःखक सरोवरि कोना बहेबै !!!!!

✍शिव कुमार झा "टिल्लू"


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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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