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गुमान अछि तेकर

गुमान अछि तेकर




✍👤विधानन्द वेदर्दी

जनमस्थान हमर मिथिला नगरी,गुमान अछि तेकर
एतै रहि सियब जीनगीक गुदरी,गुमान अछि तेकर॥

धोती,कुर्ता,गमछा सँ नित देहकेर श्रृङ्गारब हम तऽ,
माथ पर लगायब पाग आ पगरी,गुमान अछि तेकर॥

मोन होईय पढिते,लिखते,बाजिते,गाबिते रहीँ सदति,
मैथिली भाषा रहए जेना मिसरी, गुमान अछि तेकर॥

चमचम चमकैए हिरा सन सगर मिथिला धाम जगमे,
छीयै स्वर्गक एक अनुपम टुकरी,गुमान अछि तेकर॥

बटोही बनिके जौ पियासल रहब दोसर जनम लेल,
माँ कोशीए सँ भरी जीवन गगरी,गुमान अछि तेकर॥

कते मोह अछि मिथिला माटि लेल 'विद्यानन्द' के,
पढि लिय नऽ यौ चिरके अत्तरी,गुमान अछि तेकर॥
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  ✍👤 विद्यानन्द वेदर्दी
    सप्तरी,राजविराज
   हाल- विराटनगर,मोरङ्ग
   *2073/09/08।


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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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