नैनाचार ककऽ देखले तो
● गजल ◆ नैनाचार ककऽ देखले तो
✍👤विधनन्द वेदर्दी
मुरी ठार ककऽ देखले तो
नैनाचार ककऽ देखले तो॥
के वीर-अटल रे कायर?
एक वार ककऽ देखले तो॥
मैथिली DNA छै रगरगमे,
चिरफार ककऽ देखले तो॥
सहबौ नञि दामन-चापन,
बज्र प्रहार ककऽ देखले तो॥
अपन अर्जल लएके रहबौ,
आर-पार ककऽ देखले तो॥
* * *
✍👤 विद्यानन्द वेदर्दी
राजबिराज ,सप्तरी
नेपाल
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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| विधनन्द जी |
✍👤विधनन्द वेदर्दी
मुरी ठार ककऽ देखले तो
नैनाचार ककऽ देखले तो॥
के वीर-अटल रे कायर?
एक वार ककऽ देखले तो॥
मैथिली DNA छै रगरगमे,
चिरफार ककऽ देखले तो॥
सहबौ नञि दामन-चापन,
बज्र प्रहार ककऽ देखले तो॥
अपन अर्जल लएके रहबौ,
आर-पार ककऽ देखले तो॥
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✍👤 विद्यानन्द वेदर्दी
राजबिराज ,सप्तरी
नेपाल
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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