कक्का हमरो लाइब दीय, एगो सेना बाला ड्रेस
सेना बाला ड्रेस (अबोध मोनक उद्वेग)
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सीना ताइन जेबइ सीमा पर, रौशन करबै देश
कक्का हमरो लाइब दीय, एगो सेना बाला ड्रेस।।
जंग छिड़ल छै शरहद पर फेर, घात करैये दुश्मन
खौल रहल अछि खून बदन में,फरकैये ई तन मन
बनि रक्षक सीमा के हमहू, हरबै देशक क्लेश
कक्का हमरो लाइब दीय, एगो सेना बाला ड्रेस।।
देश अपन ई पुण्यभूमि अछि, अनुपम एकर गाथा
जान गमेला कतेक सेनानी,कहि जय भारत माता
आन बचेबै वीर जवानक , द हम जिनगी शेष
कक्का हमरो लाइब दीय, एगो सेना बाला ड्रेस।।
नै मतलब जिनगी के कोनो, बांचत नहिं जँ मान
अहि धरतीक गौरब के खातिर, देबै अप्पन प्राण
चीर देबै दुश्मन के सीना, देत जँ कनियों ठेस
कक्का हमरो लाइब दीय, एगो सेना बाला ड्रेस।।
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लेखकः✍👤राजीव कर्ण
राजनगर ,चिचरी, मधुबनी
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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| राजीव कर्ण |
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सीना ताइन जेबइ सीमा पर, रौशन करबै देश
कक्का हमरो लाइब दीय, एगो सेना बाला ड्रेस।।
जंग छिड़ल छै शरहद पर फेर, घात करैये दुश्मन
खौल रहल अछि खून बदन में,फरकैये ई तन मन
बनि रक्षक सीमा के हमहू, हरबै देशक क्लेश
कक्का हमरो लाइब दीय, एगो सेना बाला ड्रेस।।
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| राजीव कर्ण |
देश अपन ई पुण्यभूमि अछि, अनुपम एकर गाथा
जान गमेला कतेक सेनानी,कहि जय भारत माता
आन बचेबै वीर जवानक , द हम जिनगी शेष
कक्का हमरो लाइब दीय, एगो सेना बाला ड्रेस।।
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| लेखकः राजीव कर्ण |
नै मतलब जिनगी के कोनो, बांचत नहिं जँ मान
अहि धरतीक गौरब के खातिर, देबै अप्पन प्राण
चीर देबै दुश्मन के सीना, देत जँ कनियों ठेस
कक्का हमरो लाइब दीय, एगो सेना बाला ड्रेस।।
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लेखकः✍👤राजीव कर्ण
राजनगर ,चिचरी, मधुबनी
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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