आनक सेनुर सँ हमरे घरमे माङ्ग सजा
आनक सेनुर सँ हमरे घरमे माङ्ग सजा
✍👤विधानन्द वेदर्दी
नखड़ा देखा-देखाकऽ जलबैत रहुँ अहाँ
तोड़िके दिल बारम्बार मनबैत रहुँ अहाँ॥
घायल-दिवाना तऽ बनाइए चुकल छीयै,
रसेरस आब बताहो बनबैत रहुँ अहाँ॥
सगर संसारक एक-एक खूशी हम दैछी,
बदलामे दर्द द' हकनी कनबैत रहुँ अहाँ॥
आनक सेनुर सँ हमरे घरमे माङ्ग सजा,
हमर करेजाक शोणित बहबैत रहुँ अहाँ॥
अपन मुठ्ठीमे मुनि नित 'विद्यानन्द' के,
'राधा' कटपुतली सन खेलबैत रहुँ अहाँ॥
* * *
✍👤 विद्यानन्द वेदर्दी
विराटनगर,मोरङ्ग
☆2073/10/06।
✍👤विधानन्द वेदर्दी
नखड़ा देखा-देखाकऽ जलबैत रहुँ अहाँ
तोड़िके दिल बारम्बार मनबैत रहुँ अहाँ॥
घायल-दिवाना तऽ बनाइए चुकल छीयै,
रसेरस आब बताहो बनबैत रहुँ अहाँ॥
सगर संसारक एक-एक खूशी हम दैछी,
बदलामे दर्द द' हकनी कनबैत रहुँ अहाँ॥
आनक सेनुर सँ हमरे घरमे माङ्ग सजा,
हमर करेजाक शोणित बहबैत रहुँ अहाँ॥
अपन मुठ्ठीमे मुनि नित 'विद्यानन्द' के,
'राधा' कटपुतली सन खेलबैत रहुँ अहाँ॥
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✍👤 विद्यानन्द वेदर्दी
विराटनगर,मोरङ्ग
☆2073/10/06।

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