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फूल सन गमकति बहल बसात सभ

गीत --फूल सन गमकति बहल बसात सभ 


✍👤मैथिल प्रशान्त

बिहुँसति रहल राइत भरि बात सभ । 
फूल सन गमकति बहल बसात सभ ।। 

अहाँ छुलियै कने हम सोना भेलियै ।
जानि नहि बताहि सन कोना भेलियै ।। 
लाज  धाख  जे गहना  छल कहियो ,
एक क्षणमे भेलै आइ से कात सभ । 

सोहमे आँखिक काजर धोखरल । 
कैक जूगसँ ठोर मुसकब बिसरल ।। 
पुछू नै के सभ कनफुसकी करय ,
ई चान गाछ बिरिछ आ पात सभ ।

नअह  रंगबै  रंगबै  आइ  ठोर  हम ।
अहाँ आँगन  एबै  हेबै  विभोर हम ।।
हिय  परती  पर  जेना  बरखा भेलै, 
गम्हरल गम्हरल नेहक जजात सभ ।

~>✍👤  मैथिल प्रशान्त 
   दुर्गौली, बेनीपट्टी । 
#सिंगरहारसनभावहमर




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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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