पति- पत्नीक संवाद
।----- पति- पत्नीक संवाद----
--- प्रसंग - गाम आबैयक लेल निवेदन--
✍👤मणि कान्त झा
पत्नी - दिल्ली गेलाह , बड़ दिन भऽ गेल,
जल्दी सऽ आबू गाम यौ ।
सब अहॉक बाट ताकैत अछि,
जल्दी सऽ आबू गाम यौ ।
चौक - चौराहा , हक्कन कनैत अछि ,
सूतल अछि दलान यौं ।
जल्दी सऽ आबू-----
हर - हरवाहा पूछि रहल अछि,
लऽ कऽ अहि कऽ नाम यौ ।
राज - काज सब छौड़ि अहॉ,
जल्दी सऽ आबू गाम यौ ।
पति- ई सोचि हम, गाम सऽ अयलाहूँ ,
ख़ूब कमेबैय नाम यैं ।
टाका - ढ़ौआ खुब कमयबैय,
अहूँ कऽ पठेबैय गाम यैं।
भाग्य , अभगला, संग नै दैत अछि ,
भरि दिन छिछियोलोहक बाद,
एड़ी- चोटी एक केनैय छी ,
जल्दी सऽ भेटैय ,कोनो काज ।
बिन पाय- कौड़ी,
कोना कऽ अयबैय गाम यैं ।
कोना कऽ ------॥
पत्नी- छैठ परमेसरी सब दु:ख हरथिन,
राखू हुनके पर आस यौं।
चटपट ट्रेन पकड़ि अहॉ,
जल्दी सऽ आबू गाम यौ ।
खेत- पथार , सब कानि रहल अछि ,
घर-आँगन सब रूसि रहल अछि,
सुन्न पड़ल अछि ,दलान यौ ।
जल्दी सऽ आबू-----
बाट अहॉक ताकि रहल अछि,
हमर साज- श्रृंगार यौं ।
जल्दी सऽ आबू-----
कखनो हँसैत छी,कखनो कनैत छी,
एकान्तो मऽ गप्प,अहि सऽ करैत छी ,
जपैत छी अहिक नाम यौं ।
राज - काज सब छौड़ि अहॉ,
जल्दी सऽ आबू गाम यौ ।
पति- बाबू हमर कोना पढ़ौलनहि,
कहब तऽ निकलत ,अहॉक प्राण यैं ।
रौदि- दाहि मऽ निकलल ,
कोठी कऽ सबटा धान यैं ।
पेट काटि बाबू पढ़ौलनि,
माय बेचलि, अप्पन चानि यैं।
ई जुनि पूछूँ , कोना हम पढ़लाहूँ ,
कोना हम बिसरब गाम यैं ।
अखने , हमरा काज भेटल अछि,
कोना आयब गाम यैं ।
पत्नी- बाट- बटोही सबसऽ पूछैत अछि ,
बेटा अहि कऽ नाम यौं।
मुँह फूलैयनैय रानी बेटी,
पूछि रहल अछि,
बाबू , कहिया अयबैय गाम यौं ।
मुनियो कऽ वियाह भऽ गेलैह ,
रमूओ अयलैह गाम यौं ।
राज - काज सब छौड़ि अहॉ,
जल्दी सऽ आबू गाम यौ ।
पति- सेठ, जड़लाहा टाका देयनैय अछि ,
जे पठौनैय रहि गाम यैं ।
काम- काज सऽ छुट्टी नै दैयत अछि ,
नै छौड़ैत अछि जान यैं ।
कोना कऽ अयबैय गाम यैं ।
बिन सधेने ओहि कंसा कऽ,
कोना कऽ ------॥
पत्नी- माय - बाबू , सब पूछि रहल छथि,
बौआ, कहिया अयबैय गाम यौं।
याद करैत अछि आमक गाछि ,
ख़ाली पड़ल मचान यौं,
कानि रहल अछि अहॉ बिन ,
मालक घर आ बथान यौ ,
ओहि राकस सऽ छुट्टी लऽ,
अहॉ जल्दी आबू गाम यौं।
पति- मोनक व्यथा कि हम कहूँ,
हमर बिरह अहूँ, किछु सहूँ,
अँहि मऽ बसल अछि, हमर प्राण यैं ।
छौड़ि प्राण हम कोना रहब,
जा धरि जीयब , संगे जीयब ।
सब बिपति कऽ मिलिजुलि पियब,
भगवती पर राखूँ ध्यान यैं।
शौक़ -सेहेन्ता सब पुरा करब ,
जखने आयब हम गाम यैं ।
पत्नी - राति जगैत छी ,
दिन मऽ ,अहिक बाट तकैत छी ,
अहॉ बिन , छुटत हमर प्राण यौं।
आब नै भरोस होयत अछि ,
कहिया देब हमरा ,त्राण यौं।
बाबा कऽ हम लड्डू चढ़ैबैय,
जहिया अयबैय , अहॉ गाम यौं ।
एतेक निर्मोही अहूँ नै बनू ,
प्रिय जल्दी आबू गाम यौं।
कल जोड़ि हम विनती करैथ छी,
प्रिय , जल्दी सऽ आबू गाम यौं ।
जल्दी सऽ आबू -------
प्रिय , जल्दी सऽ आबू गाम यौं ।
पति- बाबा पर भरोस राखू
प्रिये , हम जल्दी आयब गाम यैं ।
सब किछु छोड़ि,प्रिये अहॉ लग ---
हम जल्दी आयब-----
लेखकः ✍👤 मणि कान्त झा -----
०२.०१.२०१७
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷⚡⚡
⚡⚡⚡⚡
--- प्रसंग - गाम आबैयक लेल निवेदन--
✍👤मणि कान्त झा
पत्नी - दिल्ली गेलाह , बड़ दिन भऽ गेल,
जल्दी सऽ आबू गाम यौ ।
सब अहॉक बाट ताकैत अछि,
जल्दी सऽ आबू गाम यौ ।
चौक - चौराहा , हक्कन कनैत अछि ,
सूतल अछि दलान यौं ।
जल्दी सऽ आबू-----
हर - हरवाहा पूछि रहल अछि,
लऽ कऽ अहि कऽ नाम यौ ।
राज - काज सब छौड़ि अहॉ,
जल्दी सऽ आबू गाम यौ ।
पति- ई सोचि हम, गाम सऽ अयलाहूँ ,
ख़ूब कमेबैय नाम यैं ।
टाका - ढ़ौआ खुब कमयबैय,
अहूँ कऽ पठेबैय गाम यैं।
भाग्य , अभगला, संग नै दैत अछि ,
भरि दिन छिछियोलोहक बाद,
एड़ी- चोटी एक केनैय छी ,
जल्दी सऽ भेटैय ,कोनो काज ।
बिन पाय- कौड़ी,
कोना कऽ अयबैय गाम यैं ।
कोना कऽ ------॥
पत्नी- छैठ परमेसरी सब दु:ख हरथिन,
राखू हुनके पर आस यौं।
चटपट ट्रेन पकड़ि अहॉ,
जल्दी सऽ आबू गाम यौ ।
खेत- पथार , सब कानि रहल अछि ,
घर-आँगन सब रूसि रहल अछि,
सुन्न पड़ल अछि ,दलान यौ ।
जल्दी सऽ आबू-----
बाट अहॉक ताकि रहल अछि,
हमर साज- श्रृंगार यौं ।
जल्दी सऽ आबू-----
कखनो हँसैत छी,कखनो कनैत छी,
एकान्तो मऽ गप्प,अहि सऽ करैत छी ,
जपैत छी अहिक नाम यौं ।
राज - काज सब छौड़ि अहॉ,
जल्दी सऽ आबू गाम यौ ।
पति- बाबू हमर कोना पढ़ौलनहि,
कहब तऽ निकलत ,अहॉक प्राण यैं ।
रौदि- दाहि मऽ निकलल ,
कोठी कऽ सबटा धान यैं ।
पेट काटि बाबू पढ़ौलनि,
माय बेचलि, अप्पन चानि यैं।
ई जुनि पूछूँ , कोना हम पढ़लाहूँ ,
कोना हम बिसरब गाम यैं ।
अखने , हमरा काज भेटल अछि,
कोना आयब गाम यैं ।
पत्नी- बाट- बटोही सबसऽ पूछैत अछि ,
बेटा अहि कऽ नाम यौं।
मुँह फूलैयनैय रानी बेटी,
पूछि रहल अछि,
बाबू , कहिया अयबैय गाम यौं ।
मुनियो कऽ वियाह भऽ गेलैह ,
रमूओ अयलैह गाम यौं ।
राज - काज सब छौड़ि अहॉ,
जल्दी सऽ आबू गाम यौ ।
पति- सेठ, जड़लाहा टाका देयनैय अछि ,
जे पठौनैय रहि गाम यैं ।
काम- काज सऽ छुट्टी नै दैयत अछि ,
नै छौड़ैत अछि जान यैं ।
कोना कऽ अयबैय गाम यैं ।
बिन सधेने ओहि कंसा कऽ,
कोना कऽ ------॥
पत्नी- माय - बाबू , सब पूछि रहल छथि,
बौआ, कहिया अयबैय गाम यौं।
याद करैत अछि आमक गाछि ,
ख़ाली पड़ल मचान यौं,
कानि रहल अछि अहॉ बिन ,
मालक घर आ बथान यौ ,
ओहि राकस सऽ छुट्टी लऽ,
अहॉ जल्दी आबू गाम यौं।
पति- मोनक व्यथा कि हम कहूँ,
हमर बिरह अहूँ, किछु सहूँ,
अँहि मऽ बसल अछि, हमर प्राण यैं ।
छौड़ि प्राण हम कोना रहब,
जा धरि जीयब , संगे जीयब ।
सब बिपति कऽ मिलिजुलि पियब,
भगवती पर राखूँ ध्यान यैं।
शौक़ -सेहेन्ता सब पुरा करब ,
जखने आयब हम गाम यैं ।
पत्नी - राति जगैत छी ,
दिन मऽ ,अहिक बाट तकैत छी ,
अहॉ बिन , छुटत हमर प्राण यौं।
आब नै भरोस होयत अछि ,
कहिया देब हमरा ,त्राण यौं।
बाबा कऽ हम लड्डू चढ़ैबैय,
जहिया अयबैय , अहॉ गाम यौं ।
एतेक निर्मोही अहूँ नै बनू ,
प्रिय जल्दी आबू गाम यौं।
कल जोड़ि हम विनती करैथ छी,
प्रिय , जल्दी सऽ आबू गाम यौं ।
जल्दी सऽ आबू -------
प्रिय , जल्दी सऽ आबू गाम यौं ।
पति- बाबा पर भरोस राखू
प्रिये , हम जल्दी आयब गाम यैं ।
सब किछु छोड़ि,प्रिये अहॉ लग ---
हम जल्दी आयब-----
लेखकः ✍👤 मणि कान्त झा -----
०२.०१.२०१७
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷⚡⚡
⚡⚡⚡⚡

कोई टिप्पणी नहीं