मिथिलाभूमि अछि वसुधा के हृदय !
मिथिलाभूमि अछि वसुधा के हृदय !
मिथिला गर्भपुत्र@PRABHAT RAY BHATT
माँ ......हम अहाक गर्भ में पलिरहल्छी,मुदा जन्म लेबS पहिले हम अपन मोनक बात किछ आहा कए सुनाब चाहैत छि! यी हमर पुनर्जन्म अछी, हम एहि मिथिला मे जन्म भेल छल्हु ! ताहि समय में विदेह एकटा समृद्ध राष्ट्र रहैक ! जेकर अपन भाषा अपन भेष बिदेह के गौरव रहैक,कोशी स गण्डकी तक गंगा स हिमालय के पट यी सम्पूर्ण भूमि मिथिलांचल रहैक जतय कोशी कमला विल्वती यमुनी भूयसी गेरुका जलाधीका दुधमती व्याघ्र्मती विरजा मांडवी इछावती लक्ष्मणा वाग्मती गण्डकी अर्थात गंगा आर हिमालय के मध्य भाग में यी पंद्रह नदी के अंतर्गत परम पावन तिरहुत देश विख्यात छल ! जतये कोशी कमला क वेग स संगीत उत्पन होइत्छल दुधमती स दूध बहथी नारायणी में स्नान कैयला स स्वस्थ काया भेटैत छ्ल !
गण्डकी के वेग स प्रेरित कवी गंडक काव्यसुधा रचैत छलाह ,कवी कौशकी कोशी तट बईस काव्यवाचन
करैत छलाह ! अनमोल संस्कृति आर अनुपम प्रकृति केर उद्गम स्थल याह मिथिलाधाम छल ! बागबगीचा में कोइली मीठ मीठ संगीत गबैछल शुभ-प्रभातक लाली स मिथिलाक जनजीवन स्वर्णिम होइत छ्ल ,हर घर मंदिर आ मनुष्य साधू संत चरित्र कए होएत छ्लाह ।चाहे कोनो मौसम होइक सद्खन यहि ठाँम बहैत बसंत छल!
पग पग पोखईर माछ मखान मीठ मीठ बोली मुह में पान इ छल मिथिलाक पहिचान,अहि ठाम जन्म लेलैथ पैघ पैघ विद्वान वाचस्पति, विद्यापति,गौतम, कपिल, कणाद,जौमिनी,शतानंद,श्रृंगी,ऋषि याज्ञवल्क्य ,सांडिल
,मंडन मिश्र,कुमारिल भट्ट ,नागार्जुन,वाल्मीकि, कवी कौशकी, कवी गंडक ,कालिदास, कवीर दास, आर महावीर कए कर्मभुमी इहे मिथिला थिक !
माँ जानकी राजर्षि जनक के पुत्रीक रूप में एलिह एतही भगवान शिव उगना महादेव के रुपमे महा कवी विद्यापति के चाकर बनलाह ! मिथिला भूमि से अवतरित होइत छल ऋषि मुनि साधू संत भगवान ताहि स कहलगेल की यी मिथिलाभूमि अछि वसुधा के हृदय !
मिथिलाक मान समान स्वाभिमान भाषा भेष प्रेम स्नेह ज्ञान विज्ञान विश्व बिख्यात छल! अहि ठाम जन्म लेबक लेल देवी देबता सब लालायित होइत छल ! ताहि हेतु हमहू पूर्व जन्म में माँ जानकी स कमाना
कयने रहलू जे हे माता जऊ हम फेर मानव कोइख में जन्म ली तए हमरा मिथिले में जन्म दियह ! ताहि स हम अपनेक कोइख में पली रहल छि! मुदा आजुक मिथिलाक दुर्दशा देखिक हम संकोचित भगेल्हू,विस्वास नए भरहल अछि जे ई वाह्य मिथिला छई राजर्षि जनक नगरी वैदेहिक गाम की कोनो दोसर ?
सब किछ बदलल बदलल जिका लगैय,कियो कहैय हम नेपालक मिथिला में छि त कियो कहैय हम विहारक मिथिला में छि । यी विदेह नगरी दू भाग में विभक्त कोना भगेलई माए? राजा प्रजा शाषक जनता भाषा भेष व्यबहार व्यापार ज्ञान विज्ञान सब किछ बदलल बुझाईय !
मिथिलाक अस्तित्व विलीन आ परतंत्र शासन के आधीन में हमर मिथिला कोना आबिगेल माए ?
मैथिल भाषा कियो नए बाजैय, धोती कुरता फाग के उपहास भरह्लय,महा कवी विद्यापति क गीत कियो नए गबैय ! मिथिलाक संस्कृति लोप के स्थिति में कोना आबिगेल माए ?
समां चकेवा ,जट जटिन,झिझिया,झूमर,झंडा निर्त्य,सल्हेश कुमार्विर्ज्वान,आल्हा उदल,कजरी मल्हार यी नाट्यकला सब कतय चलिगेल ? मिथिलाक एतिहासिक स्थल सब एतेक जरजट कोना भगेल ?
माए हम त पुनर्जन्म मांगने छलु मिथिला राज्य में मुदा आहा अछि विहार में,माए हम त पुनर्जन्म मांगने छलु मिथिला राज्य में मुदा आहा अछि नेपाल में ,माए हमर विदेह राज्य कतय चलिगेल ?माए हम त अपन मिथिला राज्य में जन्म लेब चाहैत छि मिथिला माए क कोरा सन निश्छल आ बत्सल प्रेम खोजलो स नए भेटत चहुओरा में !हम अपन मोनक सबटा जिज्ञासा ब्यक्त केनु आब आहा किछ मार्गदर्शन करू माए !हम मजधार में फसल छि हमर करूणा सुनी हमर सपना साकार करू माए !!!
लेखक :-✍👤प्रभात राय भट्ट
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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| कमला, |
मिथिला गर्भपुत्र@PRABHAT RAY BHATT
माँ ......हम अहाक गर्भ में पलिरहल्छी,मुदा जन्म लेबS पहिले हम अपन मोनक बात किछ आहा कए सुनाब चाहैत छि! यी हमर पुनर्जन्म अछी, हम एहि मिथिला मे जन्म भेल छल्हु ! ताहि समय में विदेह एकटा समृद्ध राष्ट्र रहैक ! जेकर अपन भाषा अपन भेष बिदेह के गौरव रहैक,कोशी स गण्डकी तक गंगा स हिमालय के पट यी सम्पूर्ण भूमि मिथिलांचल रहैक जतय कोशी कमला विल्वती यमुनी भूयसी गेरुका जलाधीका दुधमती व्याघ्र्मती विरजा मांडवी इछावती लक्ष्मणा वाग्मती गण्डकी अर्थात गंगा आर हिमालय के मध्य भाग में यी पंद्रह नदी के अंतर्गत परम पावन तिरहुत देश विख्यात छल ! जतये कोशी कमला क वेग स संगीत उत्पन होइत्छल दुधमती स दूध बहथी नारायणी में स्नान कैयला स स्वस्थ काया भेटैत छ्ल !
गण्डकी के वेग स प्रेरित कवी गंडक काव्यसुधा रचैत छलाह ,कवी कौशकी कोशी तट बईस काव्यवाचन
करैत छलाह ! अनमोल संस्कृति आर अनुपम प्रकृति केर उद्गम स्थल याह मिथिलाधाम छल ! बागबगीचा में कोइली मीठ मीठ संगीत गबैछल शुभ-प्रभातक लाली स मिथिलाक जनजीवन स्वर्णिम होइत छ्ल ,हर घर मंदिर आ मनुष्य साधू संत चरित्र कए होएत छ्लाह ।चाहे कोनो मौसम होइक सद्खन यहि ठाँम बहैत बसंत छल!
पग पग पोखईर माछ मखान मीठ मीठ बोली मुह में पान इ छल मिथिलाक पहिचान,अहि ठाम जन्म लेलैथ पैघ पैघ विद्वान वाचस्पति, विद्यापति,गौतम, कपिल, कणाद,जौमिनी,शतानंद,श्रृंगी,ऋषि याज्ञवल्क्य ,सांडिल
,मंडन मिश्र,कुमारिल भट्ट ,नागार्जुन,वाल्मीकि, कवी कौशकी, कवी गंडक ,कालिदास, कवीर दास, आर महावीर कए कर्मभुमी इहे मिथिला थिक !
माँ जानकी राजर्षि जनक के पुत्रीक रूप में एलिह एतही भगवान शिव उगना महादेव के रुपमे महा कवी विद्यापति के चाकर बनलाह ! मिथिला भूमि से अवतरित होइत छल ऋषि मुनि साधू संत भगवान ताहि स कहलगेल की यी मिथिलाभूमि अछि वसुधा के हृदय !
मिथिलाक मान समान स्वाभिमान भाषा भेष प्रेम स्नेह ज्ञान विज्ञान विश्व बिख्यात छल! अहि ठाम जन्म लेबक लेल देवी देबता सब लालायित होइत छल ! ताहि हेतु हमहू पूर्व जन्म में माँ जानकी स कमाना
कयने रहलू जे हे माता जऊ हम फेर मानव कोइख में जन्म ली तए हमरा मिथिले में जन्म दियह ! ताहि स हम अपनेक कोइख में पली रहल छि! मुदा आजुक मिथिलाक दुर्दशा देखिक हम संकोचित भगेल्हू,विस्वास नए भरहल अछि जे ई वाह्य मिथिला छई राजर्षि जनक नगरी वैदेहिक गाम की कोनो दोसर ?
सब किछ बदलल बदलल जिका लगैय,कियो कहैय हम नेपालक मिथिला में छि त कियो कहैय हम विहारक मिथिला में छि । यी विदेह नगरी दू भाग में विभक्त कोना भगेलई माए? राजा प्रजा शाषक जनता भाषा भेष व्यबहार व्यापार ज्ञान विज्ञान सब किछ बदलल बुझाईय !
मिथिलाक अस्तित्व विलीन आ परतंत्र शासन के आधीन में हमर मिथिला कोना आबिगेल माए ?
मैथिल भाषा कियो नए बाजैय, धोती कुरता फाग के उपहास भरह्लय,महा कवी विद्यापति क गीत कियो नए गबैय ! मिथिलाक संस्कृति लोप के स्थिति में कोना आबिगेल माए ?
समां चकेवा ,जट जटिन,झिझिया,झूमर,झंडा निर्त्य,सल्हेश कुमार्विर्ज्वान,आल्हा उदल,कजरी मल्हार यी नाट्यकला सब कतय चलिगेल ? मिथिलाक एतिहासिक स्थल सब एतेक जरजट कोना भगेल ?
माए हम त पुनर्जन्म मांगने छलु मिथिला राज्य में मुदा आहा अछि विहार में,माए हम त पुनर्जन्म मांगने छलु मिथिला राज्य में मुदा आहा अछि नेपाल में ,माए हमर विदेह राज्य कतय चलिगेल ?माए हम त अपन मिथिला राज्य में जन्म लेब चाहैत छि मिथिला माए क कोरा सन निश्छल आ बत्सल प्रेम खोजलो स नए भेटत चहुओरा में !हम अपन मोनक सबटा जिज्ञासा ब्यक्त केनु आब आहा किछ मार्गदर्शन करू माए !हम मजधार में फसल छि हमर करूणा सुनी हमर सपना साकार करू माए !!!
लेखक :-✍👤प्रभात राय भट्ट
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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