💞 बिप्रेक 💘 उड़ाँत
💞 बिप्रेक
💘 उड़ाँत
✍👤वि०सी०झा"बमबम"
मास्टर सेहाबक बेटा पढऽ - लिखऽ मऽ बेस तेजगर छलैइक ! ईस्कूलक परिक्षा मऽ सदिखन प्रथमे अबैत छल ! ओकरा कोनो दोस्त - महिम सऽ बेसी मतलब नहि रहैत छलैक ! ओना ईस्कूलक सब छौंड़ा - छौंड़ी सब ओकरा संऽ बात करबाक लेल आतुर रहैत छलैक , मूदा ओ ककरहु संऽ बेसी बात - चित नहि करैइत छल ! ओ अप्पन पठन - पाठनक काज सऽ बेसी मतलब रखैत छल यथा ओहि मे लागल रहैत छल ! समय बितैत गेलय आ ईस्कुलक पढा़ई समाप्त कऽ ओ आब कॉलेज जेवाऽ जोग भऽ गेल छल ! आ कॉलेज मऽ नाउ सेहो लिखौलक , ओकरहि संगे रवि बाबूक बहिन सेहो ओकरहि कॉलेज मऽ नाउ लिखेलकइ ! बता दी जे दुनू इस्कूले सऽ संगे पढ़ैत छलहि ! छौड़ी केर कॉलेज मऽ नाउ लिखेवाक घर सऽ मनाहि भेटल छलहि मूदा जिद्द केला उत्तर ओकर नाउ लिखेलहि ! शायद छौड़ी कैंऽ इस्कूले कऽ समय मास्टरक बेटा सऽ सिनेह भऽ गेल छलहि ताय पढ़वाक बेसी जिद्द ! खैर आब दुनू कॉलेज जाय लागल कनिए दिनक बाद दुनू के गप - शप सेहो खूब नीक जकाँ होमऽ लगलहि ! दुनूटा बाट - घाट सेहो निधोक भय बात - चित करऽ लगलैक ! ने जानि दुनू मे कोन एहन बदलाव एलहि अका - एक आ कोना आबि गेलय , भ सकय कॉलेजक प्रभाव हो अथवा स्नेहक प्रभाव हो ! जे होई दुनू टा आब बेस उड़ाँत भ गेल छल ! परंच गंउआ - घरुआ कैंऽ एना भऽ दुनूक मखरनाई अंसोहात जकाँ लगैइत छलैक !
होइत - होइत एक दिन इ बात रवि बाबूक कान मे सेहो परलइक जे अहाँक बहिन आ मास्टरक बेटा - - - - - !
फेर कि छलहि रवि बाबू तऽ रवि छलाह हुनक चमचा बेलचा लोकक कोन अभाव , ओकरा दूनू पर नजरि राखऽ लगलाह संयोग सऽ एक दिन दुनू कऽ कॉलेजक पाछू ठाकुरबारीक मंदिरक आंगन मऽ लगाओल फूलक बगान मऽ दुहू केर बैसल अपना आँखि सऽ देख लईत छथिन ! आ ओतय सऽ अप्पन बहिन कऽ पकरि गाड़ी मऽ बैसाऽ घर आनि लैइत छथिन !
तखर बाद प्रात भेने संउसे गाम मऽ अनघोल मचल छलहि जे रवि बाबूक बहिन फंसरि लागा मरि गेलय ! आ मास्टरक बेटा सेहो लापता छैइक ! मूदा थोरबे कालक बाद चरबाह - हरबाहक धिआ पूता हल्ला करैइत एलय जे माहटर सेहैऽबक बेटा कमला कात मऽ मूइल परल छैइक ! लोक सब दउरल नदी कात - - ! देखियो एकर साँस चलिते छहि - - - ! छौड़ जिव तऽ गेलहि मुदा सनकल सन भ गेलय ! आब तऽ ओ छौंड़ा एकदम निच्छट बताह जंका करैत रहैत छैइक ! छिछिआति रहैत छैइक बरबराइत रहैत छैइक !
#नोट :- इ कथा पूर्ण काल्पनिक अछि ! ककरहु सऽ मेल खायब मात्र संयोग होयत !
✍👤वि०सी०झा"बमबम"
मास्टर सेहाबक बेटा पढऽ - लिखऽ मऽ बेस तेजगर छलैइक ! ईस्कूलक परिक्षा मऽ सदिखन प्रथमे अबैत छल ! ओकरा कोनो दोस्त - महिम सऽ बेसी मतलब नहि रहैत छलैक ! ओना ईस्कूलक सब छौंड़ा - छौंड़ी सब ओकरा संऽ बात करबाक लेल आतुर रहैत छलैक , मूदा ओ ककरहु संऽ बेसी बात - चित नहि करैइत छल ! ओ अप्पन पठन - पाठनक काज सऽ बेसी मतलब रखैत छल यथा ओहि मे लागल रहैत छल ! समय बितैत गेलय आ ईस्कुलक पढा़ई समाप्त कऽ ओ आब कॉलेज जेवाऽ जोग भऽ गेल छल ! आ कॉलेज मऽ नाउ सेहो लिखौलक , ओकरहि संगे रवि बाबूक बहिन सेहो ओकरहि कॉलेज मऽ नाउ लिखेलकइ ! बता दी जे दुनू इस्कूले सऽ संगे पढ़ैत छलहि ! छौड़ी केर कॉलेज मऽ नाउ लिखेवाक घर सऽ मनाहि भेटल छलहि मूदा जिद्द केला उत्तर ओकर नाउ लिखेलहि ! शायद छौड़ी कैंऽ इस्कूले कऽ समय मास्टरक बेटा सऽ सिनेह भऽ गेल छलहि ताय पढ़वाक बेसी जिद्द ! खैर आब दुनू कॉलेज जाय लागल कनिए दिनक बाद दुनू के गप - शप सेहो खूब नीक जकाँ होमऽ लगलहि ! दुनूटा बाट - घाट सेहो निधोक भय बात - चित करऽ लगलैक ! ने जानि दुनू मे कोन एहन बदलाव एलहि अका - एक आ कोना आबि गेलय , भ सकय कॉलेजक प्रभाव हो अथवा स्नेहक प्रभाव हो ! जे होई दुनू टा आब बेस उड़ाँत भ गेल छल ! परंच गंउआ - घरुआ कैंऽ एना भऽ दुनूक मखरनाई अंसोहात जकाँ लगैइत छलैक !
होइत - होइत एक दिन इ बात रवि बाबूक कान मे सेहो परलइक जे अहाँक बहिन आ मास्टरक बेटा - - - - - !
फेर कि छलहि रवि बाबू तऽ रवि छलाह हुनक चमचा बेलचा लोकक कोन अभाव , ओकरा दूनू पर नजरि राखऽ लगलाह संयोग सऽ एक दिन दुनू कऽ कॉलेजक पाछू ठाकुरबारीक मंदिरक आंगन मऽ लगाओल फूलक बगान मऽ दुहू केर बैसल अपना आँखि सऽ देख लईत छथिन ! आ ओतय सऽ अप्पन बहिन कऽ पकरि गाड़ी मऽ बैसाऽ घर आनि लैइत छथिन !
तखर बाद प्रात भेने संउसे गाम मऽ अनघोल मचल छलहि जे रवि बाबूक बहिन फंसरि लागा मरि गेलय ! आ मास्टरक बेटा सेहो लापता छैइक ! मूदा थोरबे कालक बाद चरबाह - हरबाहक धिआ पूता हल्ला करैइत एलय जे माहटर सेहैऽबक बेटा कमला कात मऽ मूइल परल छैइक ! लोक सब दउरल नदी कात - - ! देखियो एकर साँस चलिते छहि - - - ! छौड़ जिव तऽ गेलहि मुदा सनकल सन भ गेलय ! आब तऽ ओ छौंड़ा एकदम निच्छट बताह जंका करैत रहैत छैइक ! छिछिआति रहैत छैइक बरबराइत रहैत छैइक !
#नोट :- इ कथा पूर्ण काल्पनिक अछि ! ककरहु सऽ मेल खायब मात्र संयोग होयत !
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| लेखक - वि०सी०झा"बमबम" |
✍🏻 वी०सी०झा"बमबम"
कैथिनियाँ
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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