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अपन अपन रंग

💐अपन अपन रंग 💐
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✍👤 अमरनाथ झा "अमर"

जीवन जीबक रूप अनेको
अलगे  होइ छै ढंग
क्यो जीबय मंजरीक संग,क्यो
नव पल्लव केर संग ।

ककरो लगलै मज्जर तँ
ककरहु मे लगलै फूल
केओ लाबि के किसलय सँ
बनबै अछि अनुकूल ।

जकरा भाग मे जे लिखल छै
तेहने तेकर रूप
मुख्य बात तँ ई, जीबन मे
दृष्य ने हो कुद्रूप ।

फलनचक्र सम थिक ई जीवन
हासिल , कखनो नागा
मज्जर-कलश समाने होइ तँ
आस भविष्यक आँगा ।


जकरा दूनू मे सँ नै किछु
जिनगी लागइ ठूठ
निरखिके नीरस रूप अपन
लागि जाइछ हरमूठ ।

सज्जित रहय स'भकेर जीवन
फ'ल, फूल आ पात
लता आस के चतरय सबहुक
नहिं कोनो अभिघात ।


लेखकः - अमरनाथ झा "अमर" जी 








✍👤अमरनाथ झा"अमर"
20/03/2017/



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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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