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आब बाहर ने रहबै चलू बसबै गाम

💐मिथिला दर्शन 💐



✍👤शिव कुमार झा टिल्लू 
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आब बाहर ने रहबै चलू बसबै गाम !!
लिखल मिथिलाके गहबरमे सीताके नाम !
आब बाहर ने रहबै चलू बसबै गाम !!

अहाँ ब'नब किसान हे हमर भगवान
ह'म रोपब अहाँले' पतैलीके पान
अपन माटिए पर सिद्ध होयत हीयाके काम  
आब बाहर ने रहबै चलू बसबै गाम !!

उठब झलफल परात खोंटब गेन्हारी पात 
अहाँ जलखै लपेटब हम लेसब अहिवात 
भावप्रेमक इजोत देखत तुलसी अविराम 
आब बाहर ने रहबै चलू बसबै गाम !!

पहिने कोकिल के तान तखन संस्कृति गान 
अहाँ बाहर सम्हारब हम नारीके मान 
देबनि देवीके' अंश भोग गमगम लताम  
 आब बाहर ने रहबै चलू बसबै गाम !!

नेना छोड़त ने भास रहत मैथिली के आश 
जानकीके रहि जेतनि संततिपर विश्वास 
जतबे साधन ओतबेमे सुखक आयाम 
 आब बाहर ने रहबै चलू बसबै गाम !!

✍👤 शिव कुमार झा "टिल्लू"

लेखक- शिव कुमार झा "टिल्लू" जी









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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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