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अहॉ नै सुनबैय, त के हमर सुनतैय (भगवती गीत)

🙏🌹 ----भगवती गीत----🌹🙏



✍👤मणि कान्त झा
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हे जगरानी,अहीं भवानी , 
सुनियौ हमरो पुकार यै ,
सुनियौ  हमर गुहार यै ।
अहॉ नै सुनबैय, त के हमर सुनतैय, (२)
केकरा पर अधिकार यै ,
हे माई केकरा पर अधिकार यै ।
         अहीं शिवानी ,अहीं भवानी,
         अहीं शयामा,कात्यायनी छी
         सबहक कष्ट निवारिणी,तारिणी ।(२)
         गौरी विन्धवासिनी छी
         दर-दर भटैक रहल छी माई, 
         नैं कोनो जोगार अछि,
         बीच भँवर मे फँसल छी माई (२)
         अहीं हमर पतवार छी ।
         यै माई, अहीं हमर पतवार छी ।
         अहॉ नै सुनबैय, त के हमर सुनतैय, (२)
हे जगरानी ,अहीं भवानी , 
सुनियौ  हमर गुहार यै ।
अहॉ नै सुनबैय, त के हमर सुनतैय, (२)
केकरा पर अधिकार यै ,
हे माई केकरा पर अधिकार यै ।(२)
       पुत कुपुत छी हम अज्ञानी
       एक बेर दया दृष्टि करियौ ।(२)
       अंतर्मन के जोत जड़ा के, 
       हमरा पर उपकार करूँ ।(२)
       अंतर्मन के जोत जड़ा के, 
       हमरा पर उपकार करूँ ।
निश दिन ध्यान धरि हे माता,
एतबे अहॉ से मॉगयैत छी ।
निश दिन ध्यान धरि हे माता,
एतबे अहॉ से मॉगयैत छी,
चरण शरण मे ध्यान धरैयत छी,
करूँ हमरो उद्धार यै ।(२)
      हे जगरानी , अहीं भवानी ,
      सुनियौ  हमर गुहार यै ।
      अहॉ नै सुनबैय, त के हमर सुनतैय, (२)
      केकरा पर अधिकार यै ,
      हे माई केकरा पर अधिकार यै ।
 हे जगरानी , अहीं भवानी ,
 हे जगरानी--- , अहीं भवानी--- ,
 हे जगरानी------ , अहीं भवानी -----
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मॉ भगवती सब मनोरथ पूर्ण करैथि ।

लेखकः- मणि कान्त झा




कवि - मणि कान्त झा जी
             

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