होली विशेष
होली विशेष
✍👤प्रभात पूनम
रंग जीवनके सरसता प्रदान करैत अछि.रंग जीवन के सरसता प्रदान करैत अछिजीवन अऔर रंगक बिच अन्योन्याश्रित सम्बन्ध थिक ! दुनुके भीतर एक दोसरक अस्तित्व विधमान अछि ! रंग जीवन के सरसता प्रदान करैत अछि तं जीवन रंग कें जीवन्तता प्रदान करैत अछि !मनुखक जन्म संगही रंग के प्रति अनुराग उमड़ लगैत अछि ताहि सं जीवनक हरेक छन आर हरेक रंग एक दोसर में समागम अछि ! रंगक त्यौहार होली मिथिला, भारत,नेपाल लगायत संसारक विभिन्न देस में अलग अलग रूप सं मनाएल जाईत अछि ! होली असत्य के ऊपरविजयक प्रतिक अछि ! एकरा लोक भाषा में होरी सब्द सं संबोधित कैलजायेत अछि ! होरी के शाब्दिक अर्थ सेहो अपने आप में बड महत्वपूर्ण अछ -"ह" के अर्थ आकाश "र"के अर्थ अग्नि या तेज होएत अछ "ओ"प्रणव अऔर 'ई"शक्ति के स्वरुप अछ तेह होरी= सम्पूर्ण ब्रह्मांड तेजपूर्ण हो ! प्रेमक पर्व होली हर्ष उलासक संग सभ गोटे मनाएल करी आ सद्भाव भाईचारा प्रेम समाज में बनाबी याह कमाना करैत सभ मित्रगन में हमर अशेष सुभकामना !!!होली पर्वक अवसर पर हमरा दिस सं किछ विशेष उपहार अहाँ सभक लेल :-
गजल:- होलि
रंग विरंगक रसरंग सं भौजी के रंगाएल चोली
रंगउडैए छै अवीरउडैए छै देखू आएल होली
होली के रंग मेंरंगाएल सभक एकही रूपरंग
दोस्ती के रंग मेंरंगाएल दुश्मन देखू आएल होली
प्रेम स्नेहकपावैन होली गाबैएगीत फगुआ टोली
रसरंग सरोवर भेल दुनिया देखू आएल होली
रंग में रंगाएलशरीरगाबैए गीत जोगी फकीर
गाबैए जोगीराबजाबैए मृदंग देखू आएल होली
रंग उड़ाबैए रंगरसिया कियो उड़ाबैए अवीर
तन मोन सभक रंगाएलदेखूआएलहोली...................
..वर्ण-२०.............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट
गजल
आब कहिया तक रहतै, हमर मोन उदास यौ पिया
होलीमें गाम एबैय,तोड़ब नै हमर विस्वास यौ पिया
अहांक ईआद में तर्सल जिया,बरसल नैना सं नीर
बैषाखी बीत बरषलै सावन,बुझलै नै प्यास यो पिया
सुकसुकराती दियाबाती, बितगेल दष्मी दशहरा यौ
छैठो में गाम नै एलौं, तोड़ी देलौं मोनक हुलास यौ पिया
मोन भ S गेल आजित, कहिया भेटत अहाँक दुलार यौ
एबेर फागुमें अहाँ आएब,मोन में अछि आस यौ पिया
जौं गाम नै आएब,हमर मुइलो मुह देख नै पाएब
फेर ककरा संग करब, प्रीतक भोग विलास योपिया..
.................वर्ण:-२१..............................रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट
गीत :-
गाम आबिजाऊ हमर दुलरुवा पिया,आबिगेलई होली
अहि केर प्रेमक रंग स: रंगाएब हम अपन चोली !!
यी प्रेमक पाती में लिखरहल छि अपन अभिलाशाक बोली अईबेर प्रभात भाईजी गाम अओता की नए पूछीरहल अछि फगुवा टोली !!बौआ काका के दालान में बनिरहल अछि फगुवाक प्लान !!चईल रहल छई चर्चा अहिके चाहे खेत होई या खलिहान !!कनिया काकी कहै छथिन बौआ क देखला बहुते दिन भगेल !!वित साल गाम आएल मुदा विना भेट केने चईल्गेल !!अहाक संगी साथी सब एक मास पाहिले गाम आबिगेल्ल !!अहाक ओझा २५ किल्लो क खसी आ भांगक पोटरी अहिलेल दगेल !!गाम आबिजाऊ हमर दुलरुवा पिया जुड़ाउ हमर हिया !!पूवा पूरी सेहो खिलाएब ,घोईर घोईर पियाएब हमअहाक भंग !!अहि केर हाथक रंग स: रंगाएब हम अपन अंग अंग !!रंग गुलाल अवीर उडाएब हम दुनुसंग संग !!गाम आबिजाऊ हमर दुलरुवा पिया,आबिगेलई होलीप्रेमक रंग स: तन मन रंगाएब एक दोसर के संग संग !!रचनाकार :-प्रभात राय भट्ट
होली मनाबू किछु हुर्दंग शेरक संग
:-१.होली में जकरा घर आएल सारी ओ भेल माला मालसारी के चोली में रंग ढारी करे गोर गाल लालेलालजोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//
२२.भैयाक सारी रंग अवीर लक चालली खेले लेल होलीसारी के रसरंग देखि बुढ्बो के मुह सं चूमा चूमा के बोलीजोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//
२३.बिच बाज़ार पारी जिका रम्कैय भैया के सारीफगुवा टोली मरैय रंगक पिचकारी सारी के पछारीजोगीरा सारा रा रा रा रा रा..........................//
२४.होली में भैया पीब खजुरक तारी भेलाह मतंगभौजी पीब दूधमें घोरी भंग पडल बिच आँगन चितंगजोगीरा सारा रा रा रा रा रा..........................//
२५.पीब क भौजी भंग बिच आँगन पडल चितंगभैया करे रासलीला छोटकी सारी के संगजोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//
२६.होली केरसरंग सं उठल सारी के मोन में तरंगसारी बनल आधा घरवाली सुतल बिच पलंगजोगीरा सारा रा रारा रा रा ..........................//
२७.भैया पीब तारी बिच बाज़ार पडल चितंगभौजी खेलेहोली छोटका दियर जी के संगजोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//
२८.दूर देस सं होली खेलS गाम एलाह हमर भैयाभौजी के चोली में रंग उझली भैया नाचे था था थैयाजोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//२
भङ्ग खेने पिया जि भकुवाएल
घुमैए फिरैए सगरो बौवाएल
दियर जि करैए बल्जोरी
ढारैए रंग भितर चोली
कहैए बुरा नहि मानु भौजी होरि छै
होरि छै भौजी होरि छै ..........
.बुरा नहि................
जोगिरा सारा रा रा रा र र ...........रा...
.अरे होलि मे आएल जिजा सङ साली
कियो मरैए सिटि कियो मारैए तालि
वाह भाइ वाह, वाह भाइ वाह .........
छौरा छेबारिक बात नहि पुछी
लपकी लपकी बुरह्बा चाटैए ठोरक लालि
वाह भाइ वाह, वाह भाइ वाह
दे ताली भाइ दे ताली
जोगिरा सारा र र र र र र रा रा......
भौजिक बोहिन बड गोर भाइ बड गोर
भौजी ससरल धिरे धिरे भैया के ओर
भौजी बोहिन सङ भेल हमर भोर
वाह भाइ वाह ,वाह भाइ वाह............
अरे लाल लाल भौजी बोहिन्क गाल
छुबी कय भेलहु हम मालामाल
जोगिरा सर र र र र र र र र र र रा
गोगिरा सरा रररररररररररर् रा रा
अरे होरि मे भेल सभ कियो मतङ
कियो पिबैए तारी कियो पिबैए भङ्ग
भैया सुतल भौजि के पलङहम
सुतलौ भौजी बोहिनक सङ
जोगिरा सारा ररर्अररर्अररररर रा
अरे लाल रङ हो चाहे पियर
होलि मे मन भावे भौजी के दियर
जोगिरा सारा रा ररर्अररराअररररररररर रा....
रचयिता:- प्रभात पुनम
होलि गीत
बहय वसन्त बतास हो रामा
आबिगेल फागुके मास ........२
रंग उरैय अविर उरैय
सभ कियो होलि खेलैय
बलम बसए परदेश मोर
बिरहमे झहरैए नयन सँ नोर हो रामा
बहय वसन्त बतास हो रामा
आबिगेल फागुके मास ........२
सगरो फागु के उजाई उठल
प्रीतम वियोग मोन मुर्झाएल
सब केर पाहुन गाम आएल
हमर बेदर्दी नहि आएल हो रामा
बहय वसन्त बतास हो रामा
आबिगेल फागुके मास ........२
पिया बिनु कोना खेलब होरि
बिरह कोना भरब नेहिया के झोरि
चलिगेल होरि के उमंग
पिया परदेशिया के सङ हो रामा
बहय वसन्त बतास हो रामा
आबिगेल फागुके मास ........२
आँखी मे बसल पिया के सुरतिया
रंग विरङ्ग रंग अंग अंग ओ रसिया
बिसरल नहि जाए सतरँगि सुरतिया
नहि रँगाएत येहि बेर हमर देहिया हो रामा
बहय वसन्त बतास हो रामा
आबिगेल फागुके मास ........२
गीतकार:- कवि प्रभात पुनम
✍👤प्रभात पूनम
रंग जीवनके सरसता प्रदान करैत अछि.रंग जीवन के सरसता प्रदान करैत अछिजीवन अऔर रंगक बिच अन्योन्याश्रित सम्बन्ध थिक ! दुनुके भीतर एक दोसरक अस्तित्व विधमान अछि ! रंग जीवन के सरसता प्रदान करैत अछि तं जीवन रंग कें जीवन्तता प्रदान करैत अछि !मनुखक जन्म संगही रंग के प्रति अनुराग उमड़ लगैत अछि ताहि सं जीवनक हरेक छन आर हरेक रंग एक दोसर में समागम अछि ! रंगक त्यौहार होली मिथिला, भारत,नेपाल लगायत संसारक विभिन्न देस में अलग अलग रूप सं मनाएल जाईत अछि ! होली असत्य के ऊपरविजयक प्रतिक अछि ! एकरा लोक भाषा में होरी सब्द सं संबोधित कैलजायेत अछि ! होरी के शाब्दिक अर्थ सेहो अपने आप में बड महत्वपूर्ण अछ -"ह" के अर्थ आकाश "र"के अर्थ अग्नि या तेज होएत अछ "ओ"प्रणव अऔर 'ई"शक्ति के स्वरुप अछ तेह होरी= सम्पूर्ण ब्रह्मांड तेजपूर्ण हो ! प्रेमक पर्व होली हर्ष उलासक संग सभ गोटे मनाएल करी आ सद्भाव भाईचारा प्रेम समाज में बनाबी याह कमाना करैत सभ मित्रगन में हमर अशेष सुभकामना !!!होली पर्वक अवसर पर हमरा दिस सं किछ विशेष उपहार अहाँ सभक लेल :-
गजल:- होलि
रंग विरंगक रसरंग सं भौजी के रंगाएल चोली
रंगउडैए छै अवीरउडैए छै देखू आएल होली
होली के रंग मेंरंगाएल सभक एकही रूपरंग
दोस्ती के रंग मेंरंगाएल दुश्मन देखू आएल होली
प्रेम स्नेहकपावैन होली गाबैएगीत फगुआ टोली
रसरंग सरोवर भेल दुनिया देखू आएल होली
रंग में रंगाएलशरीरगाबैए गीत जोगी फकीर
गाबैए जोगीराबजाबैए मृदंग देखू आएल होली
रंग उड़ाबैए रंगरसिया कियो उड़ाबैए अवीर
तन मोन सभक रंगाएलदेखूआएलहोली...................
..वर्ण-२०.............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट
गजल
आब कहिया तक रहतै, हमर मोन उदास यौ पिया
होलीमें गाम एबैय,तोड़ब नै हमर विस्वास यौ पिया
अहांक ईआद में तर्सल जिया,बरसल नैना सं नीर
बैषाखी बीत बरषलै सावन,बुझलै नै प्यास यो पिया
सुकसुकराती दियाबाती, बितगेल दष्मी दशहरा यौ
छैठो में गाम नै एलौं, तोड़ी देलौं मोनक हुलास यौ पिया
मोन भ S गेल आजित, कहिया भेटत अहाँक दुलार यौ
एबेर फागुमें अहाँ आएब,मोन में अछि आस यौ पिया
जौं गाम नै आएब,हमर मुइलो मुह देख नै पाएब
फेर ककरा संग करब, प्रीतक भोग विलास योपिया..
.................वर्ण:-२१..............................रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट
गीत :-
गाम आबिजाऊ हमर दुलरुवा पिया,आबिगेलई होली
अहि केर प्रेमक रंग स: रंगाएब हम अपन चोली !!
यी प्रेमक पाती में लिखरहल छि अपन अभिलाशाक बोली अईबेर प्रभात भाईजी गाम अओता की नए पूछीरहल अछि फगुवा टोली !!बौआ काका के दालान में बनिरहल अछि फगुवाक प्लान !!चईल रहल छई चर्चा अहिके चाहे खेत होई या खलिहान !!कनिया काकी कहै छथिन बौआ क देखला बहुते दिन भगेल !!वित साल गाम आएल मुदा विना भेट केने चईल्गेल !!अहाक संगी साथी सब एक मास पाहिले गाम आबिगेल्ल !!अहाक ओझा २५ किल्लो क खसी आ भांगक पोटरी अहिलेल दगेल !!गाम आबिजाऊ हमर दुलरुवा पिया जुड़ाउ हमर हिया !!पूवा पूरी सेहो खिलाएब ,घोईर घोईर पियाएब हमअहाक भंग !!अहि केर हाथक रंग स: रंगाएब हम अपन अंग अंग !!रंग गुलाल अवीर उडाएब हम दुनुसंग संग !!गाम आबिजाऊ हमर दुलरुवा पिया,आबिगेलई होलीप्रेमक रंग स: तन मन रंगाएब एक दोसर के संग संग !!रचनाकार :-प्रभात राय भट्ट
होली मनाबू किछु हुर्दंग शेरक संग
:-१.होली में जकरा घर आएल सारी ओ भेल माला मालसारी के चोली में रंग ढारी करे गोर गाल लालेलालजोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//
२२.भैयाक सारी रंग अवीर लक चालली खेले लेल होलीसारी के रसरंग देखि बुढ्बो के मुह सं चूमा चूमा के बोलीजोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//
२३.बिच बाज़ार पारी जिका रम्कैय भैया के सारीफगुवा टोली मरैय रंगक पिचकारी सारी के पछारीजोगीरा सारा रा रा रा रा रा..........................//
२४.होली में भैया पीब खजुरक तारी भेलाह मतंगभौजी पीब दूधमें घोरी भंग पडल बिच आँगन चितंगजोगीरा सारा रा रा रा रा रा..........................//
२५.पीब क भौजी भंग बिच आँगन पडल चितंगभैया करे रासलीला छोटकी सारी के संगजोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//
२६.होली केरसरंग सं उठल सारी के मोन में तरंगसारी बनल आधा घरवाली सुतल बिच पलंगजोगीरा सारा रा रारा रा रा ..........................//
२७.भैया पीब तारी बिच बाज़ार पडल चितंगभौजी खेलेहोली छोटका दियर जी के संगजोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//
२८.दूर देस सं होली खेलS गाम एलाह हमर भैयाभौजी के चोली में रंग उझली भैया नाचे था था थैयाजोगीरा सारा रा रा रा रा रा ..........................//२
भङ्ग खेने पिया जि भकुवाएल
घुमैए फिरैए सगरो बौवाएल
दियर जि करैए बल्जोरी
ढारैए रंग भितर चोली
कहैए बुरा नहि मानु भौजी होरि छै
होरि छै भौजी होरि छै ..........
.बुरा नहि................
जोगिरा सारा रा रा रा र र ...........रा...
.अरे होलि मे आएल जिजा सङ साली
कियो मरैए सिटि कियो मारैए तालि
वाह भाइ वाह, वाह भाइ वाह .........
छौरा छेबारिक बात नहि पुछी
लपकी लपकी बुरह्बा चाटैए ठोरक लालि
वाह भाइ वाह, वाह भाइ वाह
दे ताली भाइ दे ताली
जोगिरा सारा र र र र र र रा रा......
भौजिक बोहिन बड गोर भाइ बड गोर
भौजी ससरल धिरे धिरे भैया के ओर
भौजी बोहिन सङ भेल हमर भोर
वाह भाइ वाह ,वाह भाइ वाह............
अरे लाल लाल भौजी बोहिन्क गाल
छुबी कय भेलहु हम मालामाल
जोगिरा सर र र र र र र र र र र रा
गोगिरा सरा रररररररररररर् रा रा
अरे होरि मे भेल सभ कियो मतङ
कियो पिबैए तारी कियो पिबैए भङ्ग
भैया सुतल भौजि के पलङहम
सुतलौ भौजी बोहिनक सङ
जोगिरा सारा ररर्अररर्अररररर रा
अरे लाल रङ हो चाहे पियर
होलि मे मन भावे भौजी के दियर
जोगिरा सारा रा ररर्अररराअररररररररर रा....
रचयिता:- प्रभात पुनम
होलि गीत
बहय वसन्त बतास हो रामा
आबिगेल फागुके मास ........२
रंग उरैय अविर उरैय
सभ कियो होलि खेलैय
बलम बसए परदेश मोर
बिरहमे झहरैए नयन सँ नोर हो रामा
बहय वसन्त बतास हो रामा
आबिगेल फागुके मास ........२
सगरो फागु के उजाई उठल
प्रीतम वियोग मोन मुर्झाएल
सब केर पाहुन गाम आएल
हमर बेदर्दी नहि आएल हो रामा
बहय वसन्त बतास हो रामा
आबिगेल फागुके मास ........२
पिया बिनु कोना खेलब होरि
बिरह कोना भरब नेहिया के झोरि
चलिगेल होरि के उमंग
पिया परदेशिया के सङ हो रामा
बहय वसन्त बतास हो रामा
आबिगेल फागुके मास ........२
आँखी मे बसल पिया के सुरतिया
रंग विरङ्ग रंग अंग अंग ओ रसिया
बिसरल नहि जाए सतरँगि सुरतिया
नहि रँगाएत येहि बेर हमर देहिया हो रामा
बहय वसन्त बतास हो रामा
आबिगेल फागुके मास ........२
गीतकार:- कवि प्रभात पुनम
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| लेखकः प्रभात जी ❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤ पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी 💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙 |




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