माइ के अखियाँ से वर्शे य नोर
माइ के अखियाँ से वर्शे य नोर।।
(मधेसक वीर शहिद प्रती अप्न दु शब्द)
✍👤सरोज मण्डल
जागु जागु यौ मधेशी भेल भोर।
माइ के अखियाँ से वर्शे य नोर।।
बाप ,माइ रहेते उठ गेल अर्ति।
धन्य धन्य भेल हमर मधेशक धर्ती।।
सुन भेल आँगन मोर।
माइ के अखियाँ से वर्शे य नोर।।
कोना के माइ बान्त अप्न धिरज ।
चम चम चम्के जेना चम्के सुरज।।
भेल अब नगरी सोर।
माइ के अखियाँ से वर्शे य नोर।।
मन हर्दम व्याकुल सुनेलेल औकर बोली।
के लाउत रँग ,अबिर खेलत के होली।।
सोइच सोइच वर्शेत नोर ।
माइ के अखियाँ से वर्शे य नोर।।
जागु जागु यो मधेशी भेल भोर।
माइ के अखियाँ से वर्शे य नोर ,
माइ के अखिया वर्शे य नोर।
लेखकः-✍👤सरोज मण्डल
इनरुवा ,सुन्सरी ( नेपाल )
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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(मधेसक वीर शहिद प्रती अप्न दु शब्द)
✍👤सरोज मण्डल
जागु जागु यौ मधेशी भेल भोर।
माइ के अखियाँ से वर्शे य नोर।।
बाप ,माइ रहेते उठ गेल अर्ति।
धन्य धन्य भेल हमर मधेशक धर्ती।।
सुन भेल आँगन मोर।
माइ के अखियाँ से वर्शे य नोर।।
कोना के माइ बान्त अप्न धिरज ।
चम चम चम्के जेना चम्के सुरज।।
भेल अब नगरी सोर।
माइ के अखियाँ से वर्शे य नोर।।
मन हर्दम व्याकुल सुनेलेल औकर बोली।
के लाउत रँग ,अबिर खेलत के होली।।
सोइच सोइच वर्शेत नोर ।
माइ के अखियाँ से वर्शे य नोर।।
जागु जागु यो मधेशी भेल भोर।
माइ के अखियाँ से वर्शे य नोर ,
माइ के अखिया वर्शे य नोर।
लेखकः-✍👤सरोज मण्डल
इनरुवा ,सुन्सरी ( नेपाल )
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| लेखकः सरोज मण्डल जी |
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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