विक्रम संवत आर शक संवत
विक्रम संवत आर शक संवत
ई दुनु टा संवत शक पर भारतीय चक्रवर्ती राजा के विजय के स्मारक थिकै। विक्रम संवत ५७ ईपू सम्राट विक्रमादित्य द्वारा शक पर जीत के उपलक्ष में मानाओल जाईत छैक, जखन कि शक संवत ७८ ई. में सतवाहन द्वारा शक पर विजय के रूप में मनाओल जाइत छैक वा शक सम्राट कनिष्क द्वारा प्रारंभ कएल बताओल जाइत छैक।
शक संवत भारत केर राष्ट्रीय कैलेंडर थिकै आ विक्रम संबत हिन्दु सभक धार्मिक कलेन्डर ।
बारह मासक एक बरख आ सात दिनक एक सप्ताह रखबाक प्रचलन विक्रम संवत सँ शुरू भेल छै | मासक हिसाब सूर्य वा चंद्रमा केर गति पर राखल जाइत छैक | ई बारह टा राशि बारह टा सौर मास थिकै | जाहि दिन सूर्य जाहि राशि में प्रवेश करैत छै ओहि दिनक संक्रांति होईत छैक | पूर्णिमा के दिन, चंद्रमा जाहि नक्षत्र में होईत छै ओहि आधार पर मासक नामकरण होइत छै | चंद्र वर्ष सौर वर्ष सँ ११ दिन ३ घाटी ४८पल छोट होइत छै| तैं ३ वर्ष में अहिमे १ मास जोईड़ देल जाईत छैक |
ई चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथम नवरात्रि के प्रथम दिन सँ शुरू होईत छै।
बर्तमान में प्रचलित ईसा सन में +५७ कएला पर विक्रम संबत आ -७८ कएला पर शक सबंत निकैल अबैत छै।
शक प्राचीन आर्य के वैदिक कालीन सम्बन्धी रहल अछि जे शाकल द्वीप पर बसबाक कारण शाक अथवा शक कहेला.
पुराण में अहि जातिक उत्पत्ति सूर्यवंशी राजा नरिष्यंत सँ कहल गेल अछि।जिनका राजा सगर राज्यच्युत तथा देश सँ निर्वासित कएने छलाह। वर्णाश्रम आदि के नियम केर पालन नै करबाक कारण आ संस्कार सँ अलग रहबाक कारण ओ सब मलेच्छ भ गेल छल। हुनकहि वंशज के शक कहल गेलनि।।
साभार :- संस्कार मिथिला facebook पेज सँ
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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ई दुनु टा संवत शक पर भारतीय चक्रवर्ती राजा के विजय के स्मारक थिकै। विक्रम संवत ५७ ईपू सम्राट विक्रमादित्य द्वारा शक पर जीत के उपलक्ष में मानाओल जाईत छैक, जखन कि शक संवत ७८ ई. में सतवाहन द्वारा शक पर विजय के रूप में मनाओल जाइत छैक वा शक सम्राट कनिष्क द्वारा प्रारंभ कएल बताओल जाइत छैक।
शक संवत भारत केर राष्ट्रीय कैलेंडर थिकै आ विक्रम संबत हिन्दु सभक धार्मिक कलेन्डर ।
बारह मासक एक बरख आ सात दिनक एक सप्ताह रखबाक प्रचलन विक्रम संवत सँ शुरू भेल छै | मासक हिसाब सूर्य वा चंद्रमा केर गति पर राखल जाइत छैक | ई बारह टा राशि बारह टा सौर मास थिकै | जाहि दिन सूर्य जाहि राशि में प्रवेश करैत छै ओहि दिनक संक्रांति होईत छैक | पूर्णिमा के दिन, चंद्रमा जाहि नक्षत्र में होईत छै ओहि आधार पर मासक नामकरण होइत छै | चंद्र वर्ष सौर वर्ष सँ ११ दिन ३ घाटी ४८पल छोट होइत छै| तैं ३ वर्ष में अहिमे १ मास जोईड़ देल जाईत छैक |
ई चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथम नवरात्रि के प्रथम दिन सँ शुरू होईत छै।
बर्तमान में प्रचलित ईसा सन में +५७ कएला पर विक्रम संबत आ -७८ कएला पर शक सबंत निकैल अबैत छै।
शक प्राचीन आर्य के वैदिक कालीन सम्बन्धी रहल अछि जे शाकल द्वीप पर बसबाक कारण शाक अथवा शक कहेला.
पुराण में अहि जातिक उत्पत्ति सूर्यवंशी राजा नरिष्यंत सँ कहल गेल अछि।जिनका राजा सगर राज्यच्युत तथा देश सँ निर्वासित कएने छलाह। वर्णाश्रम आदि के नियम केर पालन नै करबाक कारण आ संस्कार सँ अलग रहबाक कारण ओ सब मलेच्छ भ गेल छल। हुनकहि वंशज के शक कहल गेलनि।।
साभार :- संस्कार मिथिला facebook पेज सँ
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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