अपनें भुमि पs कहिया नीक रोजगार हेतै (गजल)
अपने भुमि पs किहिया नीक रोजगार हेतै
✍👤प्रयाश प्रेमी मैथिल
हमर मनके सपना कहिया साकार हेतै !
मन भितरके भावना कहिया बहार हेतै !!
मनक' चौपारि पर बनाएल योजनासब ,
यी जनमासक' बिचमे कहिया प्रचार हेतै !
दर-दर भटैक रहल छी लोकsक देशमे ,
अपनें भुमि पs कहिया नीक रोजगार हेतै !!
लडैत लडैत शहीद भ'गेलैय भाइसब ,
अहिंपर संविधानमे कहिया विचार हेतै !
छुपाएल प्रयासक' यी संघर्षके डेगसब ,
लोकसबके नजरमे कहिया देखार हेतै !
आखर - १७
✍👤Prayas Premi Maithil®
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| कवि- प्रयाश प्रेमी मैथिल जी |
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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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