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अक्षय तृतीया वा आखा तीज वैशाख मासक शुक्ल पक्ष केर तृतीया तिथि


अक्षय तृतीया वा आखा तीज वैशाख मासक शुक्ल पक्ष केर तृतीया तिथि 

संकलन सह अनुवाद :✍👤नीरज मिश्र मुन्नू

अक्षय तृतीया वा आखा तीज वैशाख मासक शुक्ल पक्ष केर तृतीया तिथि के कहल जैत छैक। एहि बरख ई पावैन २९अप्रैल के अछि। पौराणिक ग्रंथक अनुसार अहि दिन जे कोनो शुभ कार्य कएल जैत अछि, तकर अक्षय फल भेटैत छैक। अहि  कारणे एकरा अक्षय तृतीया कहल जैत छैक। ओना तs सभ बारह मासक शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होइत अछि, परञ्च वैशाख मासक तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्त में मानल गेल छैक। भविष्य पुराण केर अनुसार अहि तिथिक युगादि तिथि में गणना होईत छैक, सतयुग आर त्रेता युग केर प्रारंभ अहि तिथि सँ भेल अछि। भगवान विष्णु  नर-नारायण, हयग्रीव आर परशुराम जी केर अवतरण सेहो अहि तिथि के भेल छल। ब्रह्माजी केर पुत्र अक्षय कुमार केर आविर्भाव सेहो अहि दिन भेल छल। आजुक दिन श्री बद्रीनाथ जी केर प्रतिमा स्थापित कए पूजा कएल जाइत छैक आ श्री लक्ष्मी नारायण के दर्शन करबाक परम्परा छैक। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनारायण केर कपाट सेहो अहि तिथि सँ पुनःफोलल जैत अछि। वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी जी मन्दिर में सेहो मात्र आजुक दिन श्री विग्रह केर चरण दर्शन होइत छैक, अन्यथा ओ भरि वर्ष वस्त्र सँ झाँपल रहैत अछि।  महाभारतक युद्ध सेहो आजुक दिन समाप्त भेल छल और द्वापर युग केर समापन सेहो आजुक दिन भेल छल। एहेन मान्यता अछि कि आजुक दिन सँ प्रारम्भ कएल गेल कार्य अथवा अहि  दिन कएल दानक कहियो क्षय नहि होइत छैक। 

मदनरत्नक अनुसार:

“ अस्यां तिथौ क्षयमुर्पति हुतं न दत्तं। तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया॥
उद्दिष्य दैवतपितृन्क्रियते मनुष्यैः। तत् च अक्षयं भवति भारत सर्वमेव॥

संकलन सह अनुवाद :✍👤नीरज मिश्र मुन्नू

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