"मैथिली सँ जुड़ल अछि अस्तित्व"
🙏🏽"मैथिली सँ जुड़ल अछि अस्तित्व"🙏🏽
लेखक - धीरेन्द्र पवन
जेहने छी आहाँ ओहिने रहूँ
नहि होई ये त मैथिलि ए मे बोलू
तहन प्रयास कखनो नहि छोरू
जखन खोलू मूहँ आपन मैथिलि ए मे बोलू
जन्म मिलल अछि मैथिली केरऽ घर छल
मैथिली दृश्तान्त-अदृश्तान्त सँ सच देखाय
जननी माँ आपन बच्चा सभ केरऽ
जग मे देलक अहाँ केरऽ परिचय कराय
जखन खोलू मूहँ आपन मैथिलि ए मे बोलू
अपन भाषा अपन भेष अछि स्वर्ण समान
मिथिला आ मैथिली जग मे अछि महान
आऊ हम मिल कऽ करि जानकी कऽ सम्मान
जनक अछि मिथिलाक केरऽ रचियता
हुनके सँ जुड़ल य मैथिलि कऽ अस्तित्वता
ताँ खोलु जखन मूहँ जानकी माँई बोलु
मैथिली सहज आ गुणकारी भाषा अछि
मैथिली सँ पल्टैत तकदीर केरऽ पासा अछि
मैथिली सुनि जखन हिया जौड़ायत अछि
आई कतहु छी ओ मैथिली केरऽ देन अछि
ता कहय छी जखन बोलु मैथिली मे बोलु
जेहने छी आहाँ ओहिने रहूँ
नहि होई ये त मैथिलि ए मे बोलू
तहन प्रयास कखनो नहि छोरू
जखन खोलू मूहँ आपन मैथिलि ए मे बोलू।
लेखक - धीरेन्द्र पवन
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| लेखक - धीरेन्द्र पवन जी |
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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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