वन्दना करैत छी श्री हनुमान (हनुमान जयंती विशेष )
।🌺🌷 -- वन्दना करैत छी श्री हनुमान--🌷🌺
लेखक - मणिकान्त झा
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अंजनी पुत्र अहॉ छी हनुमान,
मुँह मऽ लेलहुँ अहॉ ,सुरूज भगवान,
मरूतिक, छी अहॉ वीर संतान,
अहॉक गुणक सब देवता ,
करैत छथि बखान,
अहीं मऽ बसैत छथि ,प्रभु श्री राम ।
काज- कौशल मऽ अहॉ वीर-बलवान ,
छी अहॉ संकट मोचन कृपा निधान,
गदा अछि अहॉक बज्र समान,
कतेको राक्षसक लेलियैह अहॉ प्राण ,
लंका जारि केलियैह वीरान,
मिटा देलियै नामो निशान,
रावणक तोड़लियै अहॉ गुमान ,
लंका वासी कहलक ,
त्राहि माम् -त्राहि माम्।
कोनो बली नैअ अहॉक समान,
छी बड्ड वीर अहॉ, समार्थ्यवान,
अछि ह्रदय विशाल, आ' भुजा बलवान,
योद्धा चतुर छी अहॉ ,प्रतिज्ञावान,
दैत्य - देवता वृन्द मान,
लय संजीवनी अहॉ ,
बचेलियै लखनक प्राण,
अप्पन भक्तक करैतछियै ,अहॉ कल्याण ,
अहॉ रखैतछियै सबहक मान ,
सियारामक ह्रदय मऽ अहींक स्थान,
अहॉ छी केसरी नन्दन ,
बजरंगी अहींक नाम।
छी अहॉ धर्माचार्य महान,
हमरो कष्टक करू निदान,
हमर कियो नैअ अछि अहॉ बिन,
एक बेर हमरो पर दिऔ ध्यान ,
अहि दीनक करू सुदिन,
फेरियौ हमरो दुर्दिन,
हमहूँ जपैत छी अहींक नाम ।
छी अहॉ करूणा आ' धैर्यक खान ,
दूर करू हमर अभिमान,
अहॉ छी बल, बुद्धि आ' दयावान,
सब देवता करैयत छथि, अहींक गुणगान ,
हमरो दिअ चरण मऽ स्थान,
वन्दना करैत छी हम, अहींक श्री हनुमान,
हमरो दु:ख पर लगबियौअ विराम ,
जिनका मऽ बसल अछि अहूँक प्राण,
हमहूँ छी भक्त ,ओहि श्री राम ।
----मणिकान्त झा ----
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐👍💝💝💝💝💝💝💝💝
पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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लेखक - मणिकान्त झा
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अंजनी पुत्र अहॉ छी हनुमान,
मुँह मऽ लेलहुँ अहॉ ,सुरूज भगवान,
मरूतिक, छी अहॉ वीर संतान,
अहॉक गुणक सब देवता ,
करैत छथि बखान,
अहीं मऽ बसैत छथि ,प्रभु श्री राम ।
काज- कौशल मऽ अहॉ वीर-बलवान ,
छी अहॉ संकट मोचन कृपा निधान,
गदा अछि अहॉक बज्र समान,
कतेको राक्षसक लेलियैह अहॉ प्राण ,
लंका जारि केलियैह वीरान,
मिटा देलियै नामो निशान,
रावणक तोड़लियै अहॉ गुमान ,
लंका वासी कहलक ,
त्राहि माम् -त्राहि माम्।
कोनो बली नैअ अहॉक समान,
छी बड्ड वीर अहॉ, समार्थ्यवान,
अछि ह्रदय विशाल, आ' भुजा बलवान,
योद्धा चतुर छी अहॉ ,प्रतिज्ञावान,
दैत्य - देवता वृन्द मान,
लय संजीवनी अहॉ ,
बचेलियै लखनक प्राण,
अप्पन भक्तक करैतछियै ,अहॉ कल्याण ,
अहॉ रखैतछियै सबहक मान ,
सियारामक ह्रदय मऽ अहींक स्थान,
अहॉ छी केसरी नन्दन ,
बजरंगी अहींक नाम।
छी अहॉ धर्माचार्य महान,
हमरो कष्टक करू निदान,
हमर कियो नैअ अछि अहॉ बिन,
एक बेर हमरो पर दिऔ ध्यान ,
अहि दीनक करू सुदिन,
फेरियौ हमरो दुर्दिन,
हमहूँ जपैत छी अहींक नाम ।
छी अहॉ करूणा आ' धैर्यक खान ,
दूर करू हमर अभिमान,
अहॉ छी बल, बुद्धि आ' दयावान,
सब देवता करैयत छथि, अहींक गुणगान ,
हमरो दिअ चरण मऽ स्थान,
वन्दना करैत छी हम, अहींक श्री हनुमान,
हमरो दु:ख पर लगबियौअ विराम ,
जिनका मऽ बसल अछि अहूँक प्राण,
हमहूँ छी भक्त ,ओहि श्री राम ।
----मणिकान्त झा ----
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| कवि - मणिकान्त झा जी |
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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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