संस्मरण जे संस्कार के प्रश्न करैत अछि - अप्पन मिथिला -Appanmithila is Maithili Portal for News ,Articles and Entertainment

Breaking News

संस्मरण जे संस्कार के प्रश्न करैत अछि

संस्मरण जे संस्कार के प्रश्न करैत अछि 



✍👤डॉ. कैलाश कुमार मिश्र 

 एक बेर एक आदिवासी लड़का जे प्रखंड विकास पदाधिकारी रहथि केर विवाह ठीक भेलनि। हमर पिता पुछलथिन, "की सब भेटल सासुर सँ?" 
ओ आदमी कनि असहज होइत बजला, "की भेटत, सब सँ पैघ बात ई जे एक लड़की भेटल। ओ हमर पदनाम, मूल, गोत्र सब स्वीकारि लेलक। एक आर्थिक, सामाजिक आ आनुवंशिकता के बढ़बय बाली आबि गेली, अहि सँ नीक कथी भ सकैत अछि?" 

हमर पिता आदिवासी समाज के एहि बात जानि बहुत आश्चर्यचकित भेला। जखन हमर पिता सँ ओहि व्यक्ति के ई ज्ञात भेलैक जे अपना अर्थात मैथिल समाज में लड़की बला लड़का बला के बहुत पाई आ वस्तु दहेज़ के रूप में दैत छथि त ओ आश्चर्य आ घृणा केर भाव सँ भरि गेलैक। कारण लड़का बला के आर्थत ओ आदिवासी युवक अपन होमय बाली पत्नी के माता पिता के विवाह सँ पूर्व एक बरद, एक सुगर, एक मोन चाउर देने रहैक। 

ओ व्यक्ति हमर पिता के सम्मान दैत बाजल: "केहेन बात कहैत छी! एक त लड़की अपन घर, समाज, सब नाता छोड़ि कुल के त्यागि लड़का बला लग जिनगी भरि लेल जाइत अछि, आ ऊपर सँ लड़की बला लड़का बला के पाई आ सामान सेहो देतैक? ई कोना संभव छैक? ई केहेन समाज अछि अहाँ सभक?"

हमर एक जनजातीय मित्रानी कहली, "केहेन संस्कार अछि अहाँ समाजक?  जे सीता अहाँक मिथिला के छलि जिनकर हाथ पत्नी के रूप में ग्रहण करबा लेल के के नहि पहुचल। साक्षात् विष्णुअर्थात भगवन राम धनुष तोड़ि सीता के अपन पत्नी बनेलनि। ताहि सीता के माता पिता के आई राम अनबाक हेतु पाई आ वस्तु के व्यवस्था करय पड़ैत अछि! ऊपर सँ समाज विकसित अछि ताहि बातक दम्भ?"

आब होइत अछि  ओ ठीके त छलि। अतेक शुद्ध मोनक आ उदार होइत अछि आदिवासी सब। छली आ सब कर्म सं भरल अछि अपन मैथिल समाज। अनेरे सभ्यता आ संस्कृति में पैघ होमाक दंभ भरैत रहैत अछि। आदिवासी सब के असभ्य, जंगली, अशिक्षित, अविकसित आ ने जानि की-की कहैत अछि? बेटा के विवाह में जखन निर्लज्ज भेल अपन आ बेटा केर पद, प्रतिष्ठा, शिक्षा आदि के तराजू केर एक पलड़ा में राखि निरंकुश बनिया जकां तौलैत अछि आ मोल-भाव करैत अछि ताहि काल कत जैत छैक मर्यादा?


हमरा भेल, “कतेक निक परंपरा छैक ओहि समाजक जकरा लोक अशिक्षित, असभ्य, जंगली, आ ने जानि कोन-कोन उपहासक बात सं तुलना करैत तुच्छ बुझैत अछि?"
लेखक - डॉ. कैलाश कुमार मिश्र जी


कोई टिप्पणी नहीं