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"हमरा ओहने विधान चाही"(कबिता)

💐हमरा ओहने विधान चाही💐


✍👤रंजीत झा 

"हमरा ओहने विधान चाही"
बुड़बकहो के बेटा
पहिने कपडा निमन,
बउको के मुह मे
पड़े रोटी तिमन ,
हमरा ओहऩे विधान चाही।

रोग वियाध बिलाइत
हेराए अंहार मद्धिम,
हेमखेम अङने अङने
जुवाए दोस महिम,
हमरा ओहने विधान चाही॥

पङहत पडय मुह मे
चुवय जेकर पसेना,
ओकरो बौवा जाउक पढऽ
जेकर हाथ गतईना,
हमरा ओहने विधान चाही।

लमहर छोट उज्जर कारी
एक्के ठऽ नव पुरान,
बैठि बैसार एकताक
पञ्चैती होउक समान,
हमरा ओहने विधान चाही॥

✍👤रंजित झा, 
बलरा नगरपालिका ४, 
सर्लाही (नेपाल)

लेखकः- रंजीत झा जी

















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पोस्ट :-अशोक कुमार सहनी
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