(प्रेम)आ केकरो याद के साहारे पूरा जिनगी कैट जाइत अछि
❤❤प्रेम💙❤💙
आ केकरो याद के साहारे पूरा जिनगी कैट जाइत अछि !!
✍👤दिनेश कुमार राम
धिरे धिरे जिनगी के सब उमर कैट जाइत अछि!
जिनगी याद के किताब बैन जाइत अछि!
कखनो केकरो याद बहुत तड्पबैत अछि !
आ केकरो याद के साहारे पूरा जिनगी कैट जाइत अछि!!
प्रेम के परिभाषा सब केउ जनैत अछि !
मुदा ब्याथा ओहे जनैत अछि, जे बन्धन सँ दुर भ जाइत अछि!
इ केहन प्रेम बनबैत अछी बिधाता, केकरो पूरा त केकरो कम!
एहि प्रेम के कारणे , केकरो सँ प्रेम त केकरो सँ पिडा द क जाइत अछि !
सोचैत अछी, कि पेम कनाइ कोनो गलत त नै भ रहल अछि!
मुदा ओहे प्रेम जिनगी के घडी मे पछुताव के अन्तिम सिमा मे पहुचा दैत अछि
✍👤दिनेश कुमार राम
सुगा मधुकरही -६ धनुषा
हाल: दोहा कतार।
🎼🎼🎼🎼🎼👇🎼🎼🎼🎼🎼🎼
पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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आ केकरो याद के साहारे पूरा जिनगी कैट जाइत अछि !!
✍👤दिनेश कुमार राम
धिरे धिरे जिनगी के सब उमर कैट जाइत अछि!
जिनगी याद के किताब बैन जाइत अछि!
कखनो केकरो याद बहुत तड्पबैत अछि !
आ केकरो याद के साहारे पूरा जिनगी कैट जाइत अछि!!
प्रेम के परिभाषा सब केउ जनैत अछि !
मुदा ब्याथा ओहे जनैत अछि, जे बन्धन सँ दुर भ जाइत अछि!
इ केहन प्रेम बनबैत अछी बिधाता, केकरो पूरा त केकरो कम!
एहि प्रेम के कारणे , केकरो सँ प्रेम त केकरो सँ पिडा द क जाइत अछि !
सोचैत अछी, कि पेम कनाइ कोनो गलत त नै भ रहल अछि!
मुदा ओहे प्रेम जिनगी के घडी मे पछुताव के अन्तिम सिमा मे पहुचा दैत अछि
✍👤दिनेश कुमार राम
सुगा मधुकरही -६ धनुषा
हाल: दोहा कतार।
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| लेखकः- दिनेश कुमार राम जी |
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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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